Bengal Political Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राजनीतिक और संगठनात्मक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। वर्तमान में पार्टी अपने सबसे गंभीर और अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक और सांसद बागी तेवर अपनाकर नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पूरे बंगाल में टीएमसी नेताओं को आम जनता के भारी आक्रोश और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, कानून व्यवस्था और पुलिस-प्रशासन भी सक्रिय हो गया है और अलग-अलग आपराधिक मामलों में टीएमसी नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। इसी कड़ी में बीती रात कोलकाता से एक बड़ी खबर सामने आई, जहां टीएमसी के कद्दावर पार्षद बप्पपादित्य दासगुप्ता को जबरन उगाही (Extortion) के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया।

पटुली पुलिस स्टेशन में पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी
बप्पपादित्य दासगुप्ता कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) के एक प्रभावशाली सदस्य हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उन्हें शनिवार को एक मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था, जहां घंटों की लंबी जिरह के बाद आखिरकार पुलिस ने उन्हें आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया। बप्पपादित्य दासगुप्ता वर्तमान में कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 से पार्षद के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्थानीय पटुली पुलिस स्टेशन ने उनके खिलाफ दर्ज जबरन वसूली और डराने-धमकाने की शिकायतों के आधार पर यह सख्त कदम उठाया है। उनके राजनीतिक सफर की बात करें तो वे पहली बार साल 2015 के म्युनिसिपल चुनाव में जीत हासिल कर वार्ड नंबर 110 के पार्षद बने थे, जिसके बाद पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया।

तृणमूल युवा अध्यक्ष सौरव घोष पर भी कानून का शिकंजा
बप्पपादित्य दासगुप्ता का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है; तृणमूल कांग्रेस का दामन थामने से पहले वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रहे थे। टीएमसी के इस प्रमुख सिविक बॉडी सदस्य पर साल 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में भड़की भीषण राजनीतिक हिंसा में शामिल होने के भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। शनिवार का दिन स्थानीय टीएमसी नेतृत्व के लिए बेहद खराब रहा, क्योंकि दोपहर के समय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सबसे पहले वार्ड नंबर 101 के तृणमूल युवा अध्यक्ष सौरव घोष को गिरफ्तार किया था। इसके बाद, उसी रात पार्षद बप्पपादित्य को भी पुलिस स्टेशन तलब किया गया और पुख्ता सबूतों के आधार पर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
नगर निगम के छठे बड़े जन-प्रतिनिधि बने बप्पपादित्य
पार्षद बप्पपादित्य दासगुप्ता की यह गिरफ्तारी कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि वे कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) के छठे ऐसे तृणमूल जन-प्रतिनिधि बन गए हैं जिन्हें हाल के दिनों में पुलिस ने विभिन्न आपराधिक और भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किया है। इससे पहले केएमसी के पांच अन्य प्रमुख पार्षदों को भी पुलिस प्रशासन जेल की हवा खिला चुका है, जिनकी सूची इस प्रकार है:
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विश्वजीत मंडल: वार्ड नंबर 114 के पार्षद
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अरिजीत दास ठाकुर: वार्ड नंबर 106 के पार्षद
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सचिन सिंह: वार्ड नंबर 36 के पार्षद
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महेश कुमार शर्मा: वार्ड नंबर 2 के पार्षद
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सुदीप पोली: वार्ड नंबर 123 के पार्षद
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बप्पादित्य दासगुप्ता: वार्ड नंबर 101 के पार्षद (ताजा गिरफ्तारी)
बंगाल में ‘कटमनी’ का मुद्दा फिर गरमाया
पार्षदों की इन ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों के बीच, पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और शहरी इलाकों से पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे बेहद चौंकाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिन्होंने टीएमसी को बैकफुट पर ला दिया है। इन वीडियो में तृणमूल कांग्रेस के कई स्थानीय नेता खुद जनता के सामने हाथ जोड़कर उन्हें बुला रहे हैं और बकायदा डायरी में नाम नोट करके ‘कट मनी’ (कमीशन का पैसा) वापस लौटा रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘कट मनी’ उस अवैध रकम या कमीशन को कहा जाता है, जो सत्ताधारी दल के नेताओं ने विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और आवास योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले गरीब और आम लोगों से जबरन वसूला था। अब हार के बाद जनता के बढ़ते गुस्से और पुलिसिया कार्रवाई के डर से नेता यह पैसा वापस करने पर मजबूर हैं।

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