TMC Split : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक अभूतपूर्व राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती नजर आ रही है। राज्य विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस पहले ही दो धड़ों में विभाजित हो चुकी है, जहां पार्टी के 58 विधायकों ने बगावत करते हुए एक अलग गुट का निर्माण कर लिया है। विधानसभा के बाद अब यह संकट तृणमूल के संसदीय दल तक पहुंच गया है और पार्टी संसद में भी दो टुकड़ों में बंटने की कगार पर खड़ी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पार्टी में मची इस भारी अंतर्कलह और फूट के बीच कई तृणमूल सांसद कोलकाता छोड़कर दिल्ली का रुख कर रहे हैं, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में महाजुटान: बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में हुए लामबंद पार्टी के भीतर उभरे इस असंतोष का केंद्र अब देश की राजधानी दिल्ली बन चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एकजुट हो रहे हैं। हालांकि, बगावत करने वाले सभी सांसदों के नामों की आधिकारिक सूची अभी सामने नहीं आई है, लेकिन बड़ी संख्या में सांसदों ने दिल्ली की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं, जिनमें से लगभग 20 सांसदों का झुकाव काकोली घोष दस्तीदार के खेमे की तरफ बताया जा रहा है। ये बागी सांसद दिल्ली में किसी सरकारी आवास या बंगले में रुकने के बजाय गुप्त रूप से विभिन्न होटलों में ठहरे हुए हैं, जो रणनीति के तहत उठाया गया कदम माना जा रहा है। ममता और अभिषेक का दिल्ली दौरा: संकट के बीच इंडिया गठबंधन की बैठक पर नजरें इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी शनिवार को कोलकाता से दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनके साथ ही पार्टी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी दिल्ली आ गई हैं। इस दौरे के दौरान राजनीतिक मुलाकातों का सिलसिला भी जारी है, जिसके तहत आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आज शाम ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, सोमवार को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक में भी शिरकत करने वाले हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इस बात को लेकर आशंकित हैं कि जिस दिन ममता बनर्जी दिल्ली में होंगी, क्या उसी दिन तृणमूल संसदीय दल में कोई बहुत बड़ा विस्फोट या विभाजन देखने को मिलेगा? संसदीय दल में संभावित विभाजन का गणित: ┌──────────────────────┬──────────────────────┐ │ सदन │ कुल सांसद / बागी │ ├──────────────────────┼──────────────────────┤ │ लोकसभा (TMC) │ 28 कुल / 20 बागी │ │ राज्यसभा (TMC) │ 13 कुल / 9 बागी │ └──────────────────────┴──────────────────────┘ दिग्गज नेताओं ने बनाई दूरी: टीएमसी के कई बड़े चेहरे बगावत के मूड में सूत्रों का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के कई नामचीन और कद्दावर सांसदों ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और आधिकारिक कार्यक्रमों से पूरी तरह दूरी बना ली है। इन नेताओं में मुख्य रूप से जून माल्या, दीपक अधिकारी (सुपरस्टार देव), यूसुफ पठान, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, शत्रुघ्न सिन्हा, पार्थ भौमिक और जगदीश चंद्र बसुनिया शामिल हैं। जून माल्या पिछले कई दिनों से पार्टी की किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले रही हैं और कथित तौर पर एक ओटीटी (OTT) प्रोजेक्ट की शूटिंग में व्यस्त बताई जा रही हैं। केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी असंतोष की आग फैल चुकी है। टीएमसी के 13 राज्यसभा सांसदों में से 9 सांसद पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं। अब केवल डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेन, मेनका गुरुस्वामी, सागरिका घोष और समीरुल इस्लाम ही ममता बनर्जी के प्रति वफादार बने हुए हैं। नौकरशाह और दलबदलू भी संपर्क में: पूर्व डीजीपी राजीव कुमार और बाबुल सुप्रियो की भूमिका इस बगावत की आंच केवल मौजूदा सांसदों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार राज्य के प्रशासनिक और अन्य राजनीतिक हलकों से भी जुड़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी और ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार भी इस बागी गुट के लगातार संपर्क में बने हुए हैं। इसके साथ ही, भारतीय जनता पार्टी (BJP) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामने वाले नेता बाबुल सुप्रियो भी कथित तौर पर इस बागी खेमे के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। इन महत्वपूर्ण चेहरों की मौजूदगी से बागी गुट का पलड़ा और मजबूत होता दिखाई दे रहा है, जिससे ममता बनर्जी की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नया ब्लॉक बनाने का खाका: लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने की तैयारी में बागी बागी सांसदों की योजना लोकसभा के भीतर अपनी स्थिति को पूरी तरह बदलने की है। सूत्रों का कहना है कि ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मिलकर उन्हें एक पत्र सौंपने का ब्लूप्रिंट तैयार कर चुके हैं। इस पत्र के जरिए वे अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में पार्टी के नेता पद से हटाने की मांग करेंगे, क्योंकि वे अभिषेक बनर्जी को अपना संसदीय नेता मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका मुख्य उद्देश्य लोकसभा के अंदर एक नया ‘तृणमूल ब्लॉक’ स्थापित करना है, ठीक उसी तरह जैसे विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में एक अलग गुट बनाया गया था। बागी सांसद संभवतः कल ही लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर इस योजना को अमलीजामा पहना सकते हैं। भाजपा का रुख और कानूनी पेच: दलबदल विरोधी कानून से बचने की बड़ी चुनौती इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पैनी नजर बनी हुई है, लेकिन पार्टी ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। भाजपा नेतृत्व फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के किसी भी बागी सांसद को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में बागी सांसदों का यह समूह संसद में एक अलग और स्वतंत्र ब्लॉक के रूप में ही कार्य करेगा। भाजपा इस बात की निगरानी करेगी कि सदन के भीतर फ्लोर को-ऑर्डिनेशन (सदन समन्वय) के मामलों में लोकसभा की आगामी नीति क्या रहती है। दलबदल विरोधी कानून की चुनौती बागी सांसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के सख्त दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से खुद को बचाने की है। कानून के दायरे में आने















