Poisonous Monkey: स्लो लोरिस को पहली नजर में देखने पर यह छोटा और बेहद प्यारा जीव नजर आता है। इसकी बड़ी-बड़ी गोल आंखें, घना मुलायम फर और बेहद धीमी चाल लोगों का ध्यान खींचती है। इसकी मासूम शक्ल देखकर कई लोगों को इसे छूने या गोद में उठाने का मन हो सकता है। लेकिन इस छोटे से जीव के भीतर एक ऐसी अनोखी क्षमता छिपी है, जो इसे बेहद खास और संभावित रूप से खतरनाक बनाती है।

जहरीले काटने वाला अनोखा प्राइमेट
स्लो लोरिस को दुनिया के ऐसे दुर्लभ प्राइमेट के रूप में जाना जाता है, जिसके काटने में विषैला प्रभाव पाया जाता है। प्राइमेट समूह में इंसान, बंदर और एप्स जैसे जीव शामिल हैं। खतरा महसूस होने पर स्लो लोरिस अपनी कोहनी के पास मौजूद विशेष ग्रंथियों से निकलने वाले तरल का इस्तेमाल करता है। यह तरल इसकी लार के साथ मिलकर ऐसा मिश्रण बनाता है, जिसे काटने के दौरान शरीर में पहुंचाया जा सकता है।

कोहनी की ग्रंथियों में छिपा है राज
स्लो लोरिस के शरीर में कोहनी के पास विशेष ग्रंथियां होती हैं। इन ग्रंथियों से तेल जैसा एक तरल निकलता है। जब यह जीव खुद को खतरे में महसूस करता है, तो इस तरल को चाटकर अपनी लार के साथ मिला लेता है। इसके बाद तैयार हुआ विषैला मिश्रण इसके काटने के दौरान दांतों के जरिए सामने वाले जीव के शरीर में पहुंच सकता है।
काटने पर हो सकता है गंभीर असर
स्लो लोरिस का काटना इंसानों के लिए काफी दर्दनाक हो सकता है। काटे जाने के बाद प्रभावित हिस्से में तेज दर्द, सूजन और घाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में घाव को ठीक होने में कई सप्ताह तक का समय लग सकता है। इसलिए इस छोटे जीव को देखने पर उसे पकड़ने या छूने की कोशिश करना सुरक्षित नहीं माना जाता।
एलर्जी का खतरा भी रहता है
कुछ संवेदनशील लोगों में स्लो लोरिस के काटने के बाद गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। ऐसी स्थिति में एनाफिलैक्टिक शॉक तक का खतरा बताया जाता है, जो गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है। यही वजह है कि वन्यजीव विशेषज्ञ इस जीव से दूरी बनाए रखने और इसे छेड़ने से बचने की सलाह देते हैं।

रात में सक्रिय रहता है स्लो लोरिस
स्लो लोरिस मुख्य रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाया जाता है। यह निशाचर जीव है, यानी रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है। दिन के दौरान यह अक्सर पेड़ों पर आराम करता है, जबकि रात में भोजन की तलाश में निकलता है। इसकी धीमी गति के बावजूद यह पेड़ों पर रहने के लिए अच्छी तरह अनुकूलित है।
क्या खाता है यह अनोखा जीव?
स्लो लोरिस के भोजन में पेड़ों से निकलने वाला रस, फूलों का रस, फल और विभिन्न प्रकार के छोटे कीड़े-मकोड़े शामिल होते हैं। जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में यह अपनी भूमिका निभाता है। पेड़ों पर रहने और रात में सक्रिय होने के कारण इसका जीवन जंगल के प्राकृतिक वातावरण से गहराई से जुड़ा हुआ है।
अवैध व्यापार से बढ़ा खतरा
स्लो लोरिस के सामने प्राकृतिक खतरों के साथ इंसानी गतिविधियों से जुड़ी बड़ी चुनौतियां भी हैं। अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण इन्हें जंगलों से पकड़कर पालतू जानवर के रूप में बेचने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा तेजी से हो रही जंगलों की कटाई और प्राकृतिक आवास के खत्म होने से भी इनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है।
जंगल में सुरक्षित रहना ही बेहतर
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि स्लो लोरिस जैसे दुर्लभ जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही रहने देना चाहिए। सोशल मीडिया पर इसकी मासूम तस्वीरें देखकर इसे पालतू बनाने की कोशिश करना न सिर्फ इंसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता है, बल्कि जीव के लिए भी नुकसानदेह है। इसके संरक्षण के लिए जंगलों को बचाना, अवैध व्यापार रोकना और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
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