Jharkhand Political : झारखंड में राज्यसभा चुनाव की दो सीटों को लेकर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही सियासी तनातनी आखिरकार पूरी तरह समाप्त हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की जिद पर अड़े जेएमएम प्रमुख और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को समझाने में सफलता पा ली है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस द्वारा भेजे गए पार्टी के विशेष पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेता अजय शर्मा ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर सीएम हेमंत सोरेन के साथ उनके आवास पर एक लंबी और मैराथन चर्चा की, जिसके बाद दोनों दलों के बीच का गतिरोध दूर हो गया और सोरेन मान गए।

गठबंधन में बनी सहमति, सीएम हेमंत सोरेन ने विधायकों को डिनर पर बुलाया
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच उपजा तनाव अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मान जाने के बाद अब यह तय हुआ है कि दोनों पार्टियां झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर एक-एक उम्मीदवार उतारेंगी। इस महत्वपूर्ण सहमति के बनते ही गठबंधन में छाई अनिश्चितता के बादल छट गए हैं। कांग्रेस और जेएमएम के बीच आपसी तालमेल बैठने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज रात यानी रविवार (7 जून) को सत्ताधारी गठबंधन के सभी विधायकों को एक विशेष डिनर पर आमंत्रित किया है, जहां आगामी रणनीति पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।

कांग्रेस ने प्रणव झा को बनाया उम्मीदवार, यहीं से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 की घोषणा के बाद से ही सत्ताधारी गठबंधन के भीतर जेएमएम और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान की स्थिति पैदा हो गई थी। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस आलाकमान ने झारखंड के मूल निवासी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मीडिया सलाहकार प्रणव झा को अपनी तरफ से राज्यसभा का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। कांग्रेस द्वारा इस एकतरफा घोषणा के बाद से ही गठबंधन सहयोगी दल जेएमएम के भीतर असंतोष के सुर मुखर होने लगे थे।
जेएमएम ने जताई थी कड़ी नाराजगी, कहा- हमें विश्वास में नहीं लिया गया
कांग्रेस द्वारा गठबंधन के भीतर बिना चर्चा किए दो में से एक सीट पर अपने उम्मीदवार प्रणव झा के नाम का ऐलान करने पर जेएमएम ने बेहद कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। जेएमएम के शीर्ष नेतृत्व ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि उनके सहयोगी दल ने मुख्यमंत्री या पार्टी की मंजूरी के बिना यह बड़ा निर्णय लिया है। जेएमएम के महासचिव और वरिष्ठ प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कांग्रेस ने उन्हें विश्वास में लिए बिना अपने प्रत्याशी की घोषणा करके गठबंधन धर्म की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।
संख्या बल के भरोसे जेएमएम ने किया था दोनों सीटों पर लड़ने का ऐलान
इस विवाद के बढ़ने के बाद जेएमएम की ओर से जवाबी कदम उठाते हुए दोनों ही राज्यसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का खुला ऐलान कर दिया गया था। चूंकि मौजूदा विधानसभा में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास दोनों सीटों को आसानी से जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है, इसलिए जेएमएम ने अकेले दम पर ही आगे बढ़ने का मन बना लिया था। जमीनी और विधायी स्थिति को देखते हुए, पार्टी ने प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी को किसी भी तरह का राजनीतिक लाभ या जीत हासिल करने से रोकने के लिए दोनों सीटों पर खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया था। बीते शुक्रवार को जेएमएम के कोर नेतृत्व की बैठक के बाद कई नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी दोनों सीटों पर पर्चा दाखिल करेगी।
जेएमएम ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को बनाया प्रत्याशी, दावेदारी पर अड़े थे नेता
इस पूरे सियासी ड्रामे के बीच शनिवार (6 जून) को जेएमएम ने एक सीट पर अपने पत्ते खोलते हुए पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। जेएमएम के वरिष्ठ प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस नाम का आधिकारिक ऐलान किया था। इस दौरान जेएमएम विधायक और उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने भी कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने प्रणव झा के नाम की घोषणा करने से पहले जेएमएम नेतृत्व को विश्वास में नहीं लिया था। बैजनाथ राम के अनुसार, संख्या बल के हिसाब से राज्यसभा की दोनों सीटों पर स्वाभाविक रूप से जेएमएम की ही मजबूत दावेदारी बनती थी, इसीलिए बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने मुख्यमंत्री को दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की सलाह दी थी। हालांकि, अब कांग्रेस के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझ गया है।
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