MP Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। आगामी राज्यसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को एक तगड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। मध्य प्रदेश से कांग्रेस की आधिकारिक राज्यसभा उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (पर्चा) जांच के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया गया है।

स्क्रूटनी के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधिक दल ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन फॉर्म की वैधानिकता पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी। बीजेपी का आरोप था कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने हलफनामे में एक महत्वपूर्ण आपराधिक मामले (क्रिमिनल केस) की जानकारी को दुर्भावनापूर्ण तरीके से छिपाया है। बता दें कि मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व यानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों का बेहद करीबी और भरोसेमंद रणनीतिकार माना जाता है।

वरिष्ठ कांग्रेस सांसद और प्रख्यात वकील विवेक तन्खा ने दी सफाई
मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के बाद कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई है। इस बीच पार्टी के सीनियर नेता, राज्यसभा सांसद और देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, “मीनाक्षी नटराजन जी के नॉमिनेशन (नामांकन) को लेकर राजनीतिक विरोधियों द्वारा समाज में सरासर भ्रम फैलाया जा रहा है।
उनके खिलाफ किसी भी थाने या अदालत में कोई भी क्रिमिनल केस (अपराधिक मामला) दर्ज नहीं है। असल में, मात्र एक प्रशासनिक नोटिस आया है कि उनके और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ 10 करोड़ रुपये के वित्तीय कंपनसेशन (मुआवजे) की दंडात्मक कार्यवाही क्यों ना की जाए। इस सामान्य नोटिस का मीनाक्षी जी के अधिकृत वकील ने पहले ही कानूनी रूप से विस्तृत जवाब दे दिया है। पूरे मामले में कहीं भी कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं है।”
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का भाजपा पर तीखा हमला
इस पूरे चुनावी विवाद पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ ने भी सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए सत्तारूढ़ दल को आड़े हाथों लिया और कहा, “मध्य प्रदेश के राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस की न्यायसंगत सीट को अनैतिक रूप से हड़पने के लिए भाजपा अब घटिया राजनीति की सभी लोकतांत्रिक मर्यादाएं तोड़ने में जुटी है। भाजपा के इशारे पर पहले तो कांग्रेस के विधायकों को लाने वाली चार्टर्ड फ्लाइट को जानबूझकर लंबे समय तक हवा में रखा गया और लैंडिंग की इजाज़त नहीं दी गई।

इसके बाद, सोची-समझी रणनीति के तहत कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के वैध नामांकन के ख़िलाफ़ पूरी तरह से द्वेषपूर्ण और मनगढ़ंत तरीके से आपत्ति दर्ज कराई गई। इतना ही नहीं, विधानसभा परिसर के भीतर भी भाजपा नेताओं ने जानबूझकर हंगामा खड़ा किया। लेकिन भाजपा को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि कांग्रेस उनके इन कायरतापूर्ण हथकंडों से डरने वाली नहीं है और अंततः उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी।”
मैदान में बचे अब सिर्फ तीन प्रत्याशी
इस अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों का चुनावी गणित पूरी तरह से बदल गया है। बता दें कि 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए कुल 4 उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल किए थे, जिसमें मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा था। लेकिन तकनीकी आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद अब चुनावी मैदान में सिर्फ 3 उम्मीदवार ही शेष बचे हैं। दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात यह है कि बाकी बचे ये तीनों ही उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हैं। ऐसे में अब बिना मतदान के ही बीजेपी के तीनों प्रत्याशियों का निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुना जाना पूरी तरह तय हो गया है।
क्रॉस वोटिंग के डर से कांग्रेस ने अपने 48 विधायकों को बेंगलुरु किया शिफ्ट
राज्यसभा चुनाव में किसी भी प्रकार की टूट, क्रॉस वोटिंग या खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की आशंका को भांपते हुए कांग्रेस आलाकमान ने पहले ही बेहद कड़े सुरक्षा उपाय किए थे। पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले अपने करीब 48 विधायकों को एकजुट रखने के लिए मध्य प्रदेश से बाहर सीधे कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू शिफ्ट कर दिया था। कांग्रेस को डर था कि सत्तारूढ़ दल उनके विधायकों में सेंधमारी कर सकता है। हालांकि, विधायकों को सुरक्षित रखने की कांग्रेस की यह भारी-भरकम कवायद धरी की धरी रह गई, क्योंकि मतदान की नौबत आने से पहले ही तकनीकी पेंच और नामांकन की त्रुटि के कारण कांग्रेस रेस से बाहर हो गई और बीजेपी ने बिना चुनाव लड़े ही बाजी मार ली।
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