Egg Freezing Process and Age: आधुनिक दौर में महिलाओं की जीवनशैली और सामाजिक प्राथमिकताओं में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आज के समय में महिलाएं आत्मनिर्भर बनने और करियर को संवारने के लिए देर से शादी करने का फैसला ले रही हैं। हालांकि, इस बदलती लाइफस्टाइल, काम के तनाव और खानपान की आदतों के कारण महिलाओं के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव भी हो रहे हैं। इन तमाम विसंगतियों का सीधा और प्रतिकूल असर महिलाओं की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) पर पड़ने लगा है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, करीब 35 साल की उम्र पार करने के बाद महिलाओं के शरीर में अंडों (Eggs) की गुणवत्ता और संख्या दोनों में तेजी से गिरावट आने लगती है। ऐसे में जो कामकाजी महिलाएं करियर पर ध्यान केंद्रित करने की चाहत में देरी से फैमिली प्लान या बच्चे करने का फैसला ले रही हैं, उनके लिए ‘एग फ्रीजिंग’ एक बेहतरीन और क्रांतिकारी तकनीक साबित हो रही है। हालांकि, भारत में अभी एग फ्रीज करवाने का चलन मुख्य रूप से बड़े महानगरों तक ही सीमित है और चुनिंदा जागरूक महिलाएं ही यह बड़ा फैसला ले रही हैं, लेकिन भविष्य की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद फायदेमंद कदम है। आइए दिल्ली की प्रसिद्ध फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से जानते हैं कि इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है और इसके लिए सबसे सही उम्र कौन सी होती है।

फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. कनिका शर्मा का मत: एग फ्रीजिंग डर नहीं, बल्कि भविष्य पर नियंत्रण का माध्यम
बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, दिल्ली की वरिष्ठ फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर कनिका शर्मा के अनुसार, एग फ्रीजिंग (ओओसाइट क्रायोप्रेजर्वेशन) उन सभी महिलाओं के लिए एक बहुत ही सुरक्षित और वरदान स्वरूप विकल्प है, जो वर्तमान की बजाय भविष्य में कभी मां बनने या बेबी प्लान करने की इच्छा रखती हैं। डॉक्टर कनिका का कहना है कि इस मेडिकल प्रक्रिया को लेकर समाज में किसी भी प्रकार के डर, झिझक या घबराहट की कोई बात नहीं है। यह असल में महिलाओं को अपने जीवन की चॉइस (विकल्प) और अपने सुंदर भविष्य पर पूरा नियंत्रण रखने की आजादी देता है।
अगर कोई महिला अपने व्यक्तिगत कारणों, गंभीर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों (जैसे कैंसर या कीमोथेरेपी से पहले) या अपने किसी बड़े बिजनेस व व्यवसाय से जुड़े कारणों से मां बनने के अपने सुखद निर्णय को कुछ सालों के लिए टालना चाहती है, तो एग फ्रीजिंग उन्हें यह सुनहरा अवसर देता है कि वह अपनी फर्टिलिटी को बढ़ती उम्र के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित कर सकें, ताकि उनके एग्स भविष्य में भी उतने ही हेल्दी और युवा रह सकें।
कैसी होती है एग्स को सुरक्षित फ्रीज करने की पूरी क्लीनिकल प्रक्रिया?
डॉक्टर कनिका शर्मा ने इस जटिल दिखने वाली तकनीक को आसान शब्दों में समझाते हुए बताया कि एग फ्रीज करवाने की प्रक्रिया कुछ बेहद सरल लेकिन बेहद जरूरी मेडिकल स्टेप्स (चरणों) के तहत पूरी की जाती है, जो इस प्रकार हैं:

-
प्रारंभिक जांच (Basic Tests): प्रक्रिया के सबसे पहले चरण में महिला के कुछ जरूरी ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं, जिससे उनके शरीर में मौजूद हार्मोन के स्तर और ओवरी में एग्स की वर्तमान कंडीशन (रिजर्व) की सटीक जांच की जा सके।
-
हार्मोनल स्टिमुलेशन (Hormonal Injections): इसके बाद, महिला को लगभग 10 से 12 दिनों तक रोजाना विशेष हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ओवरीज (अंडाशय) को एक साथ कई सारे स्वस्थ एग्स मैच्योर और रिलीज करने के लिए तैयार करना होता है।
-
एग रिट्रीवल (Eggs Retrieval): जब अंडे पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, तो महिला को हल्का बेहोश (Sedation) करके एक बहुत ही बारीक सुई की मदद से ओवरी से इन एग्स को बाहर निकालने की मामूली सर्जिकल प्रक्रिया की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में महज 15 से 20 मिनट का समय लगता है और महिला को कोई दर्द नहीं होता।
-
क्रायोप्रेजर्वेशन (Cryopreservation): अंत में, डॉक्टर द्वारा निकाले गए इन परिपक्व अंडों को अत्याधुनिक लैब में बेहद कम तापमान (-196 डिग्री सेल्सियस) पर लिक्विड नाइट्रोजन के भीतर सुरक्षित रूप से फ्रीज कर स्टोर कर दिया जाता है।
निकाले गए अंडों का कब तक कर सकते हैं इस्तेमाल
इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि ओवरी से सुरक्षित बाहर निकाले गए इन एग्स का तुरंत इस्तेमाल करने की कोई कानूनी या चिकित्सकीय बाध्यता नहीं होती है। इस पूरी प्रक्रिया का एकमात्र और मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समय की पाबंदी से आजाद करना, जीवन में बेहतर विकल्प देना और उन्हें एक मानसिक शांति प्रदान करना है ताकि वे बिना किसी जैविक दबाव (बायोलॉजिकल क्लॉक) के अपना जीवन जी सकें। डॉक्टर कनिका शर्मा के मुताबिक, चिकित्सा के दृष्टिकोण से सबसे बेहतरीन और गुणात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए महिलाओं को 30 से 35 साल की उम्र से पहले ही डॉक्टर से उचित परामर्श करके अपने एग फ्रीज करवा लेने चाहिए, क्योंकि इस उम्र में अंडों की जेनेटिक क्वालिटी सबसे उत्तम होती है।
Read More : FIFA World Cup 2026: 48 टीमें और 104 मैच, जानें भारत में कब और कितने बजे दिखेंगे मुकाबले












