EU Ban : यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच यूरोपीय यूनियन (EU) ने रूस की आर्थिक और सैन्य कमर तोड़ने के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन ने आधिकारिक तौर पर 21वें प्रतिबंध पैकेज का ऐलान कर दिया है, जिससे भारत और चीन समेत दुनिया के कई देशों की लगभग 50 कंपनियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। इस नए और बेहद कड़े प्रतिबंध पैकेज के तहत रूस की मदद करने वाले तीसरे देशों की कंपनियों पर सख्त निर्यात प्रतिबंध (एक्सपोर्ट कंट्रोल) लागू कर दिए गए हैं। यूरोपीय यूनियन का मुख्य उद्देश्य उन सभी वित्तीय और रक्षा संसाधनों को पूरी तरह से रोकना है, जिनका इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को लंबा खींचने और अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कर रहा है।

प्रतिबंधों के दायरे में आए कई प्रमुख देश और रक्षा क्षेत्र पर सीधा हमला
यूरोपीय यूनियन द्वारा तैयार की गई इस नई ब्लैकलिस्ट में कई विकासशील और विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाली कंपनियों को एक्सपोर्ट कंट्रोल सूची में डाला गया है। इस लिस्ट में भारत और चीन के अलावा तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), किर्गिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देशों की कंपनियां शामिल हैं। यूरोपीय यूनियन की जांच के मुताबिक, ये कंपनियां रूस को ऐसी संवेदनशील तकनीक और दोहरे उपयोग (डुअल-यूज़) वाली वस्तुएं निर्यात कर रही थीं, जिनका सीधा इस्तेमाल रूसी सेना अपने हथियार, मिसाइल और सैन्य बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए कर रही है। इसके साथ ही, रूस की सैन्य विनिर्माण क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाने के लिए ड्रोन निर्माण और तकनीक से जुड़ी 30 से अधिक नई कंपनियों को भी इस प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है।

रूस के बैंकिंग, वित्तीय नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी पर चौतरफा घेराबंदी
यूरोपीय संघ का यह नया प्रतिबंध केवल व्यापारिक कंपनियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए रूस के पूरे वैश्विक वित्तीय तंत्र को पंगु बनाने की रणनीति तैयार की गई है। इस प्रतिबंध प्रस्ताव के तहत, प्रतिबंधित लिस्ट में शामिल तीसरे देशों के लगभग 90 प्रमुख बैंकों की संपत्तियों (एसेट्स) को तुरंत प्रभाव से फ्रीज करने की तैयारी है। इसके अलावा, रूस और उसके सहयोगी देशों में सक्रिय 30 से अधिक बड़े बैंकों के अंतरराष्ट्रीय लेनदेन पर अब यूरोपीय एजेंसियां कड़ी निगरानी रखेंगी। इतना ही नहीं, पश्चिमी देशों के इन कड़े प्रतिबंधों को बाईपास करने या उनसे बचने के लिए रूस जिन चोर रास्तों का इस्तेमाल करता था, उन्हें रोकने के लिए 11 बड़े क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स के लेन-देन पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
रूसी ‘शैडो फ्लीट’ पर नकेल और कच्चे तेल की कीमतों पर सख्त पाबंदी
रूस अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद दुनिया भर में अवैध रूप से कच्चा तेल बेचने के लिए पुराने और बिना पहचान वाले जहाजों के एक बड़े बेड़े का इस्तेमाल करता है, जिसे वैश्विक बाजार में ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। यूरोपीय यूनियन ने इस गुप्त नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए अपनी पाबंदी सूची में 30 नए जहाजों को शामिल किया है, जो अब किसी भी यूरोपीय बंदरगाह का उपयोग नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही, रूस के 2 महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाहों और 4 प्रमुख हवाई अड्डों पर भी सुरक्षा प्रतिबंध बेहद कड़े कर दिए गए हैं। रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले क्रूड ऑयल पर दबाव बढ़ाते हुए, यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के लिए ‘प्राइस कैप’ को आगामी 6 महीनों के लिए 44.10 डॉलर प्रति बैरल पर पूरी तरह से फ्रीज कर दिया है।
भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंधों का असर और रणनीतिक संबंधों पर मंडराता खतरा
यूरोपीय संघ के इस कड़े फैसले का भारत पर भी काफी गहरा और सीधा असर पड़ने की आशंका है। इस एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में जिन भारतीय कंपनियों के नाम शामिल किए गए हैं, वे अब यूरोपीय संघ के किसी भी सदस्य देश या वहां की स्थानीय कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार, निवेश या उच्च तकनीक (टेक्नोलॉजी) का लेन-देन नहीं कर सकेंगी। रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ के इस एकतरफा और सख्त कदम के कारण आने वाले समय में भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रही महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में भारी तनाव पैदा हो सकता है, जिससे वैश्विक कूटनीति के समीकरण भी प्रभावित होंगे।
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