Punjab Paper Leak: पंजाब में कथित प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। विपक्ष राज्य सरकार पर परीक्षा प्रणाली को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान अपनी सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहे हैं। इस विवाद ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस भी तेज हो गई है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोपों को किया खारिज
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार के लगभग साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में राज्य की किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए गलत जानकारी फैला रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिल रहे हैं।

अभिजीत दीपके ने आंदोलन की रणनीति के दिए संकेत
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके से जब पंजाब में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि उनकी टीम इस विषय पर भी अपनी रणनीति तैयार कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर भी संगठन अपनी बात सार्वजनिक करेगा। यह टिप्पणी उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल से मुलाकात के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए की।
छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग
अभिजीत दीपके ने सरकार से मांग की कि छात्र आंदोलनों के दौरान जिन विद्यार्थियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना था कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार और छात्रों के बीच सकारात्मक बातचीत जरूरी है, ताकि युवाओं का विश्वास व्यवस्था पर बना रहे।
मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह में बोले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जीरकपुर में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भी इस विषय पर अपनी बात रखी। यह समारोह हाल ही में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की पुनः परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले सरकारी स्कूलों के 882 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुनः परीक्षा के टॉपर आर्यन गुप्ता पंजाब के लुधियाना से हैं, जो पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने छात्रों की सफलता को शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया।
नकल के एक मामले का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष जिस तरह से लगातार पेपर लीक के आरोप लगा रहा है, वह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उनके अनुसार राज्य में केवल नकल का एक मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर दी थी। उन्होंने बताया कि फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा के दौरान फिरोजपुर में पेन कैमरे और अन्य आधुनिक उपकरणों के माध्यम से नकल कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया गया था। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की गई।
सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता का दावा
भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर 68,585 सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार को स्थान नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य सरकार का उद्देश्य योग्य युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना और भर्ती प्रणाली में लोगों का भरोसा मजबूत करना है।
विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग
दूसरी ओर, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आरोप लगाया कि राज्य में बार-बार पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े विवाद सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि सरकार को केवल आरोपों का जवाब देने के बजाय परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं, सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए लगातार खारिज कर रहा है।
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