Congress Strategy : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के साथ गठबंधन करने का पुरजोर समर्थक था। इसके बावजूद, तत्कालीन सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) कांग्रेस को अपनी नई सरकार और सत्ता में हिस्सेदार बनाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। हालांकि, लंबे समय के पुराने राजनीतिक रिश्तों और चुनावी तालमेल के मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान ने आखिरकार डीएमके के साथ ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया।

लेकिन चुनावी नतीजे चौंकाने वाले रहे और इस चुनाव में डीएमके गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ, सुपरस्टार विजय की पार्टी टीवीके सत्ता के बेहद करीब पहुंच गई। ऐसी स्थिति में, महज 5 विधायकों वाली कांग्रेस ने बेहद चतुराई दिखाते हुए विजय की पार्टी को अपना समर्थन दे दिया और बदले में नई सरकार में दो मंत्री पद और एक राज्यसभा सीट हासिल करने में कामयाबी पा ली।

कांग्रेस के पाला बदलने से भड़की डीएमके
कांग्रेस के इस अप्रत्याशित कदम और पाला बदलने से नाराज होकर डीएमके ने कांग्रेस पर सीधे तौर पर दगाबाजी और पीठ में छुरा घोंपने का गंभीर इल्जाम लगा दिया। इसके साथ ही डीएमके ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक से खुद को पूरी तरह अलग करने का आधिकारिक एलान कर दिया। चूंकि कांग्रेस को अब तमिलनाडु के भविष्य की राजनीति में सुपरस्टार विजय की पार्टी टीवीके के भीतर अपना बेहतर राजनीतिक भविष्य दिखाई दे रहा है, इसलिए सोमवार को बुलाई गई विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस सहयोगी दलों के सामने टीवीके को इंडिया ब्लॉक का हिस्सा बनाने का औपचारिक प्रस्ताव रखने की पूरी तैयारी में थी।
लेकिन कांग्रेस अपनी रणनीति पर आगे बढ़ती, उससे पहले ही वामपंथी (लेफ्ट) दलों समेत कई अन्य सहयोगियों ने कांग्रेस पर भारी दबाव बना दिया और दो टूक कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत विपक्ष के लिए डीएमके को इंडिया ब्लॉक में वापस लाना बेहद जरूरी है।
संसद के अंकगणित के आगे झुकी कांग्रेस
सहयोगी दलों का तर्क था कि डीएमके ने हमेशा से देश में लोकसभा सीटों के परिसीमन, धर्मनिरपेक्षता (सेकुलरिज्म) और पुरजोर भाजपा विरोध का झंडा बुलंद रखा है। इसके साथ ही, जिस तरह हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों में एक बड़ी टूट की खबरें और आशंकाएं सामने आ रही हैं, उसे देखते हुए संसद में डीएमके के सांसदों की संख्या और उनकी मौजूदगी विपक्ष के लिए बहुत मायने रखती है।
विपक्षी नेताओं को डर है कि अगर नाराज होकर डीएमके के सांसद संसद में वोटिंग के दौरान वॉकआउट या अबस्टेन (तटस्थ) भी करने लगे, तो केंद्र सरकार अपने मनमाने और विवादित बिलों को बिना किसी अड़चन के आराम से पास करा लेगी। इसी बड़े राजनीतिक दबाव के आगे झुकते हुए कांग्रेस ने सोमवार की बैठक में टीवीके को शामिल करने का अपना प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया और अपने सुर बदलते हुए राष्ट्रीय हित में डीएमके को इंडिया ब्लॉक का एक अटूट और बेहद जरूरी हिस्सा बताया। इसके साथ ही कांग्रेस ने डीएमके की नाराजगी को जल्द से जल्द दूर करने का भरोसा भी दिया।
भविष्य में टीवीके को गठबंधन में शामिल करने की उम्मीद
विपक्षी खेमे में मची इस उथल-पुथल के बीच राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ महासचिव नासिर हुसैन ने पार्टी का पक्ष रखते हुए मीडिया के सामने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य स्तर पर गठबंधन में कुछ नए राजनीतिक एडजस्टमेंट (समझौते) हुए हैं, जिसकी वजह से हमारी पुरानी सहयोगी डीएमके निश्चित रूप से नाराज है।
लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि डीएमके राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया ब्लॉक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और इंटीग्रल पार्ट (अभिन्न अंग) है, और कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही बैठकर उनकी तमाम गलतफहमियों और नाराजगी को पूरी तरह दूर कर देगा। नासिर हुसैन ने यह भी साफ किया कि चूंकि टीवीके फिलहाल औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है, इसलिए उन्हें इस बार की बैठक में आने का न्योता नहीं भेजा गया था। हालांकि, उन्होंने भविष्य में टीवीके को इस बड़े गठबंधन में शामिल किए जाने के रास्ते खुले रहने की बात भी कही।
कांग्रेस को समझ आया संसद का असली गणित
वास्तव में, इंडिया ब्लॉक की इस महत्वपूर्ण बैठक के खत्म होने के बाद डीएमके को लेकर कांग्रेस के तेवरों में आई यह नरमी बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। तृणमूल कांग्रेस में चल रही बड़ी टूट की खबरों के बीच कांग्रेस को साल 2029 तक संसद के भीतर का असली अंकगणित अच्छे से समझ आ चुका है। कांग्रेस इस बात को बखूबी जानती है कि भले ही तमिलनाडु की सत्ता में इस समय सुपरस्टार विजय की टीवीके का दबदबा हो, लेकिन साल 2029 तक लोकसभा के भीतर टीवीके के पास कोई भी सांसद मौजूद नहीं रहने वाला है।
ऐसे में कांग्रेस आलाकमान अब डीएमके प्रमुख को मनाने के लिए पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, वामपंथी दलों और कांग्रेस के त्रिकोणीय रिश्तों का हवाला दे सकता है। कांग्रेस का प्रयास होगा कि डीएमके को इस बात के लिए राजी किया जाए कि वह राज्य की स्थानीय राजनीति को केंद्र की राष्ट्रीय राजनीति से बिल्कुल अलग रखकर सोचे।
डीएमके ने संसद में मांगी अलग सीटें
हालांकि, तमिलनाडु की सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस का इस तरह डीएमके का साथ छोड़ देना और सीधे टीवीके के पाले में चले जाना द्रमुक नेतृत्व को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं हो रहा है। डीएमके अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उस किसी गठबंधन का हिस्सा बने रहने के पक्ष में नहीं है, जहां उनके धुर विरोधी सुपरस्टार विजय की टीवीके को शामिल करने की बात चल रही हो।
डीएमके को इस पूरे घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में अपने वोट बैंक और जनाधार के बड़े नुकसान का गहरा डर सता रहा है। यही वजह है कि उसने आनन-फानन में इंडिया ब्लॉक से नाता तोड़ लिया और संसद के भीतर बैठने के लिए विपक्ष से अलग अपनी सीटों की मांग भी लोकसभा अध्यक्ष से कर दी। ऐसे में अब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट रखने और डीएमके की इस बड़ी उलझन को सुलझाना कांग्रेस आलाकमान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होने वाला है।
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