Dictators Chefs Stories : दुनिया के इतिहास में कई ऐसे क्रूर और सनकी तानाशाह हुए हैं, जिनके नाम मात्र से ही लोग कांप उठते थे। उनके जुल्मों, खौफ और तानाशाही की अनगिनत कहानियां इतिहास की किताबों में सुनहरे अक्षरों के बजाय खून से दर्ज हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया है कि इन निर्दयी शासकों के बेहद करीब रहने वाले, यानी उनके निजी रसोइयों (शेफ) की जिंदगी कैसी होती होगी? एक ऐसी रसोई, जहां हर सेकेंड मौत का साया मंडराता रहता था।

वहां नमक का थोड़ा तेज हो जाना या खाने के स्वाद में जरा सी भी ऊंच-नीच होने का सीधा और इकलौता मतलब होता था-मौत की खौफनाक सजा। पोलिश पत्रकार विटोल्ड स्जाबलोव्स्की की मशहूर किताब पर आधारित एक नई डॉक्यूमेंट्री ‘हाउ टू फीड ए डिक्टेटर’ (How to Feed a Dictator) में इदी अमीन, सद्दाम हुसैन, किम जोंग-इल और पोल पॉट जैसे दुनिया के सबसे बदनाम तानाशाहों के निजी रसोइयों ने अपनी जिंदगी के उन खौफनाक और अनसुने पन्नों को दुनिया के सामने खोला है, जो अब तक इतिहास के गर्त में छिपे हुए थे।

दुनिया की सबसे खतरनाक नौकरी: जहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी
इस चौंकाने वाली डॉक्यूमेंट्री में साफ तौर पर दिखाया गया है कि एक क्रूर तानाशाह का निजी रसोइया होना दुनिया के सबसे खतरनाक और तनावपूर्ण कामों में से एक था। इन रसोइयों के लिए खाना बनाने की सबसे पहली और अनिवार्य रेसिपी ही यही थी कि ‘कभी कोई गलती न करना’। इन शेफ्स को हर दिन, हर पकवान बनाते समय अपनी जान हथेली पर रखनी पड़ती थी। आइए विस्तार से जानते हैं कि इतिहास के इन सबसे क्रूर शासकों के खान-पान की आदतें कैसी थीं, उन्हें खाने में क्या पसंद था और उनके रसोइयों ने पर्दे के पीछे किस कदर डर, ऐशो-आराम और खौफ से भरी एक हैरान करने वाली जिंदगी जी थी।
सद्दाम हुसैन का मछली प्रेम और पहचान छिपाने की मजबूरी
इराक के बेहद क्रूर और तानाशाह शासक सद्दाम हुसैन के बारे में उसके पूर्व रसोइए ने कई बड़े खुलासे किए हैं। रसोइए के अनुसार, सद्दाम हुसैन को मछली का बारबेक्यू बेहद पसंद था। वह खास तौर पर ग्रिल्ड कार्प डिश का दीवाना था, जिसे स्थानीय भाषा में ‘मसगूफ’ कहा जाता है। सद्दाम इस डिश के बिना एक दिन भी नहीं रह सकता था। वह अपने रसोइए पर इस कदर मेहरबान रहता था कि उसे हर साल इनाम के तौर पर एक चमचमाती नई कार तोहफे में देता था। हालांकि, सद्दाम का खौफ आज भी इस रसोइया के जेहन में इस कदर हावी है कि वह इस डॉक्यूमेंट्री में अपनी असली पहचान छिपाकर और चेहरा ढककर सामने आया, ताकि आज के दौर में भी कोई उसे पहचान न सके और उसकी जान को खतरा न हो।
पसंदीदा ग्रिल्ड कार्प मछली ही बनी सद्दाम हुसैन के काल का कारण
इस पूरी दास्तान में सबसे दिलचस्प और हैरान कर देने वाला मोड़ तब आता है, जब यह पता चलता है कि सद्दाम हुसैन की यही सबसे पसंदीदा मछली एक दिन उसकी मौत और पतन का मुख्य कारण बन गई। साल 2003 में जब अमेरिकी सेना ने इराक पर हमला किया और सद्दाम का तख्तापलट हो गया, तब वह अपनी जान बचाने के लिए अमेरिकी सैनिकों से छिपता फिर रहा था।
उस दौरान भी वह अपनी इस पसंदीदा ग्रिल्ड कार्प मछली को खाने का मोह नहीं छोड़ पाया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को सद्दाम के ठिकाने के आस-पास इस खास मछली के पकाए जाने का सुराग मिला। इसी सुराग का पीछा करते हुए अमेरिकी सैनिकों ने आखिरकार उसे रेगिस्तान के बीच एक छोटे से बंकर (स्पाइडर होल) से जिंदा ढूंढ निकाला, जिसके बाद उसे फांसी की सजा दी गई।
इदी अमीन की आदमखोर छवि और रसोइए की बदलती किस्मत
युगांडा के बेहद खूंखार और निर्दयी तानाशाह इदी अमीन के निजी रसोइया चार्ल्स ओटोन्डे ओडेरा की कहानी किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है। चार्ल्स पहले एक बेहद गरीब ग्रामीण थे, लेकिन जैसे ही वे इदी अमीन के मुख्य रसोइया बने, उनकी किस्मत रातों-रात बदल गई। उन्हें आलीशान मर्सिडीज कार मिली, ऐशो-आराम की तमाम सुविधाएं दी गईं और वे इतने अमीर हो गए कि अपनी आठ पत्नियों का शाही खर्च उठाने लगे।
इदी अमीन के खाने की आदतों के बारे में चार्ल्स बताते हैं कि वह इतना बड़ा पेटू था कि एक बार में पूरी की पूरी भुनी हुई बकरी चबा जाता था। अमीन को इस बात से बेहद मानसिक संतुष्टि और खुशी मिलती थी जब ब्रिटिश और पश्चिमी मीडिया उसके ‘आदमखोर’ होने की अफवाहों से डरते थे। हालांकि, अमीन खुद सार्वजनिक रूप से इस बात को नकारता था और मजाक में कहता था कि इंसान का मांस बहुत ज्यादा नमकीन होता है, इसलिए वह इसे नहीं खाता।
सनक की हद: मामूली बात पर वफादार रसोइए को मिली मौत की सजा
चार्ल्स की यह ऐशो-आराम से भरी जिंदगी तब अचानक नरक और खौफ में बदल गई, जब इदी अमीन की मानसिक सनक अपने सातवें आसमान पर पहुंच गई। चार्ल्स ने रोते हुए बताया कि एक बार अमीन ने उन्हें एक इंसान का दिल पकाकर लाने का क्रूर आदेश दिया था। अमीन का अंधविश्वास था कि यदि आप अपने दुश्मन का दिल खा लेते हैं, तो उस मरे हुए इंसान की आत्मा आपको कभी परेशान नहीं करती।
हद तो तब हो गई जब एक दिन दोपहर का खाना खाने के बाद इदी अमीन के बच्चे के पेट में सामान्य सा दर्द उठा। इस बेहद मामूली और प्राकृतिक बात पर तानाशाह अमीन इतना आगबबूला हो गया कि उसने अपने सबसे वफादार रसोइए चार्ल्स पर खाना खराब बनाने का आरोप लगाते हुए सीधे मौत की सजा सुना दी। हालांकि, चार्ल्स बेहद खुशकिस्मत रहे कि वे वहां से चुपचाप भागने और अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।
किम जोंग-इल का पिज्जा प्रेम और रसोई में सख्त मिलिट्री पहरा
उत्तर कोरिया के पूर्व तानाशाह किम जोंग-इल के लिए खाना पकाना किसी बेहद गुप्त और खतरनाक जासूसी मिशन को अंजाम देने जैसा था। इटली के मशहूर और पेशेवर शेफ एर्मानो फुरलानिस ने किम जोंग-इल के लिए पिज्जा बनाने के उन तनावपूर्ण दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि तानाशाह किम जोंग-इल को पेपरोनी पिज्जा से बेहद प्यार था। जब फुरलानिस उत्तर कोरिया में तानाशाह के लिए खाना बनाते थे, तो उनकी पूरी जिंदगी चौबीसों घंटे सरकारी खुफिया एजेंसियों की कड़ी निगरानी में रहती थी। वहां कदम रखते ही उनका पासपोर्ट और दस्तावेज जब्त कर लिए गए थे और पूरी रसोई में हर वक्त आधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मी तैनात रहते थे।
भुखमरी के बीच तानाशाह के ठाट और जैतून नापने की सनक
सुरक्षा और सनक का आलम यह था कि जब शेफ फुरलानिस पिज्जा तैयार करते थे, तो उत्तर कोरियाई मिलिट्री अधिकारी और डॉक्टर रसोई में आकर बाकायदा स्केल से इस बात की जांच करते थे कि पिज्जा के ऊपर रखे गए जैतून (ओलिव्स) के टुकड़े बिल्कुल बराबर दूरी पर हैं या नहीं।
फुरलानिस बताते हैं कि जब उत्तर कोरिया के आम नागरिक दाने-दाने को तरस रहे थे, भुखमरी से मर रहे थे और जीवित रहने के लिए घास-फूस खाने को मजबूर थे, तब उस तानाशाह के लिए इटली और यूरोप के अन्य देशों से बेहद महंगे, ताजे और आलीशान खाद्य पदार्थ विशेष विमानों के जरिए कुछ ही दिनों में मंगा लिए जाते थे। जब एक बार इटैलियन शेफ ने बचा हुआ खाना बाहर भूखे बच्चों में बांटने की बात कही, तो उनके इस मानवीय प्रस्ताव को अधिकारियों द्वारा तुरंत और बेहद सख्ती से खारिज कर दिया गया तथा उन्हें दोबारा ऐसा न करने की चेतावनी दी गई।
पोल पॉट की रसोइया की अटूट वफादारी और अंधभक्ति का सच
कंबोडिया के बेहद क्रूर और कुख्यात तानाशाह पोल पॉट, जिसके शासनकाल के दौरान खमेर रूज के अत्याचारों से करीब 15 से 30 लाख निर्दोष लोग बेरहमी से मारे गए थे, उसकी निजी रसोइया केओ सामून आज भी उसे किसी भगवान की तरह पूजती है। वह आज भी नियमित रूप से पोल पॉट की कब्र पर जाती है और वहां श्रद्धापूर्वक मछली, ताजे फल और चावल का भोग चढ़ाती है।
सामून के लिए पोल पॉट कोई लाखों लोगों का नरसंहार करने वाला राक्षस नहीं, बल्कि एक बेहद दयालु इंसान था जिसने उसकी शादी का पूरा खर्च उठाया था और उसे सम्मान दिया था। हालांकि, डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के दौरान जब कंबोडियाई ट्रांसलेटर ने सामून को पोल पॉट के खमेर रूज शासन के दौरान आम जनता पर हुए भयानक जुल्मों, यातनाओं और टॉर्चर की रोंगटे खड़े करने वाली कहानियां सुनाईं, तब जाकर सामून की आंखों में आंसू आ गए और उसने रोते हुए यह स्वीकार किया कि हां, पोल पॉट से इतिहास में कुछ बहुत बड़ी और भयानक गलतियां जरूर हुई थीं।
ऑगस्टो पिनोशे के शेफ का चौंकाने वाला तर्क: ‘यही जिंदगी है’
इसी तरह, चिली के क्रूर सैन्य तानाशाह ऑगस्टो पिनोशे के निजी शेफ कोको पाचेको आज भी अपने पुराने मालिक के प्रति पूरी तरह से वफादार और समर्पित हैं। उन्होंने पिनोशे की याद में उनकी मिलिट्री कैप को आज भी अपने घर में एक कांच के बक्से में बेहद संभालकर सुरक्षित रखा है। पाचेको का कहना है कि रसोई के अंदर वे दोनों कभी भी देश की राजनीति या मानवाधिकारों की बात नहीं करते थे, बल्कि केवल खाने, वाइन और हंसी-मजाक पर चर्चा करते थे।
जब इंटरव्यूअर ने उनसे पिनोशे के आदेश पर मारे गए, गायब किए गए और प्रताड़ित किए गए हजारों बेकसूर नागरिकों के बारे में पूछा, तो उन्होंने बेहद ठंडे और शांत अंदाज में एक चौंकाने वाला तर्क दिया। पाचेको ने कहा कि एक तानाशाह या शासक होने के नाते कई बार देश चलाने के लिए आपको कुछ ऐसे कड़े और अप्रिय आदेश देने पड़ते हैं जो आप व्यक्तिगत तौर पर नहीं देना चाहते, आखिरकार यही जिंदगी है और इसे बदला नहीं जा सकता।
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