TMC Rebellion : देश की राजनीति और विशेषकर पश्चिम बंगाल से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी सियासी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है और पार्टी के बागी लोकसभा सांसदों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक हो चुकी है। इस सूची में टीएमसी के 19 सांसदों के नाम दर्ज हैं। राजनैतिक सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़कर अलग होने वाले कुल 20 में से 19 सांसदों के नामों का खुलासा हुआ है, जिन्होंने बीती 18 मई को ही लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के कार्यालय को अपने लिखित हस्ताक्षर के साथ नाम भेज दिए थे। भारतीय राजनीति के नियमों के मुताबिक, इन बागियों को संसद में अपना एक बिल्कुल अलग गुट बनाने के लिए कम से कम 19 सांसदों के पुरजोर समर्थन की आवश्यकता थी, जो कि अलग गुट के गठन के लिए आवश्यक पार्टी की कुल संसदीय ताकत का कानूनी रूप से दो-तिहाई (2/3) हिस्सा है।

ममता बनर्जी को लगा सबसे बड़ा सियासी झटका
इस ऐतिहासिक और अप्रत्याशित राजनैतिक उठापटक के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने 28 साल के लंबे राजनीतिक इतिहास में अब तक के सबसे भीषण और विनाशकारी संकट के दौर से गुजर रही है। पार्टी की सर्वोच्च नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी ही पार्टी के भीतर एक अत्यंत जबरदस्त और व्यापक आंतरिक बगावत का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस बागी सूची पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में पूर्व दिग्गज क्रिकेटर यूसुफ पठान, युवा नेता सायनी घोष और माला रॉय जैसी हाई-प्रोफाइल हस्तियों के नाम शामिल हैं। इन बड़े चेहरों की बगावत के कारण तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से दो धड़ों में विभाजित होने (बंटने) के कगार पर पहुंच गई है, जिससे बंगाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

बागी लोकसभा सांसदों के नामों की पूरी सूची
लोकसभा स्पीकर के कार्यालय को सौंपे गए आधिकारिक पत्र के आधार पर जो 19 बागी सांसद टीएमसी से अलग हुए हैं, उनके नामों की विस्तृत सूची इस प्रकार है:
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काकोली घोष दस्तीदार
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शताब्दी रॉय
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बापी हलदर
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डॉ. शर्मिला सरकार
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प्रसून बंद्योपाध्याय
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जगदीश बर्मा बसुनिया
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असित कुमार मल
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अरूप चक्रवर्ती
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रचना बनर्जी
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सायोनी घोष
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खलीलुर्रहमान
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अबू ताहिर खान
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यूसुफ़ पठान
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मिताली बैग
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माला रॉय
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कालीपद सोरेन
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दीपक अधिकारी
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जून मालिया
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पार्थ भौमिक
लोकसभा स्पीकर से अलग गुट की मांग
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर को यह गोपनीय पत्र 18 मई को ही सौंप दिया गया था। इस संयुक्त पत्र में सांसदों ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि भारतीय संविधान की ‘दसवीं अनुसूची’ (दल-बदल विरोधी कानून) के कड़े प्रावधानों के तहत उनकी कुल संख्या टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 है, जो कि कानूनी रूप से अनिवार्य दो-तिहाई हिस्से की शर्त को पूरी तरह संतुष्ट करती है। सांसदों ने स्पीकर से पुरजोर मांग की है कि इस संख्याबल को ध्यान में रखते हुए संसद के भीतर उन्हें एक स्वतंत्र और अलग गुट के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान की जाए। इसके साथ ही उन्होंने सदन की कार्यवाही के दौरान मौजूदा विपक्षी जगह (बेंचों) से अलग हटकर उनके बैठने की विशेष व्यवस्था करने का भी आग्रह किया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी मची भगदड़
इस बगावत का असर केवल दिल्ली की संसद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल की स्थानीय राजनीति में भी टीएमसी पूरी तरह बिखर गई है। बंगाल के हालिया चुनाव में मिली करारी और अप्रत्याशित हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी में चौतरफा टूट देखने को मिल रही है। राज्य विधानसभा के भीतर ममता बनर्जी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए सदन में अपना एक अलग गुट गठित कर लिया है। राज्य विधानसभा के स्पीकर ने भी त्वरित कदम उठाते हुए बागी गुट के प्रमुख नेता ऋतुव्रत बनर्जी को विधानसभा में आधिकारिक तौर पर ‘नेता विपक्ष’ के रूप में अपनी मान्यता दे दी है।
राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से संकट गहराया
लोकसभा और विधानसभा में लगी इस राजनैतिक आग के बीच तृणमूल कांग्रेस को राज्यसभा में भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। पार्टी के तीन वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों ने भी अपने पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया है, जिससे ममता बनर्जी का केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह पंगु नजर आ रहा है। एक तरफ जहां विधानसभा के 58 विधायकों ने बगावत की, वहीं अब लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने स्पीकर को पत्र लिखकर अलग बैठने की मांग कर दी है। इन चौतरफा झटकों ने ममता बनर्जी के राजनैतिक साम्राज्य की नींव को हिलाकर रख दिया है और आगामी दिनों में पार्टी का अस्तित्व बचाने का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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