Mizoram News : मिजोरम की राजधानी आइजोल में रात के करीब साढ़े 11 बजे जब पारा गिरने लगता है और सड़कें पूरी तरह सुनसान हो जाती हैं, तब कुछ आम युवक हाथों में टॉर्च और लकड़ी के डंडे लिए मुस्तैद नजर आते हैं। ये कोई पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि ‘यंग मिजो एसोसिएशन’ (वाईएमए) के निस्वार्थ वॉलेंटियर्स हैं। ये युवा कड़कड़ाती ठंड और सन्नाटे के बीच केवल इसलिए पहरा दे रहे हैं ताकि म्यांमार से आ रहे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स ‘आइस’ से अपनी अगली पीढ़ी को महफूज रख सकें। मिजोरम इस समय अपने इतिहास के सबसे भयावह नशा संकट के दौर से गुजर रहा है, जिसने पूरे सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है।

खुली सीमा बनी कॉरिडोर
मिजोरम की म्यांमार के साथ लगती 500 किलोमीटर लंबी खुली और असुरक्षित सीमा इस पूरे काले कारोबार की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है। म्यांमार की सीमा से सटा चंफाई जिला इस तस्करी का मुख्य कॉरिडोर माना जाता है, जहां बीते 3 वर्षों के भीतर सुरक्षा एजेंसियों ने करीब 4,000 किलोग्राम ड्रग्स जब्त की है। आंकड़ों की मानें तो इस जानलेवा सिंथेटिक नशें ने पिछले साल 118 मासूमों की जान ली थी, जबकि इस साल भी अब तक 21 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी पगडंडियों के रास्ते छोटे पेडलर्स रात के अंधेरे में इस मौत के सामान को भारत लाते हैं।

हाईटेक हुई ड्रग्स की तस्करी
इस पूरे नशीले नेटवर्क का सबसे डरावना पहलू यह है कि यह पूरा अवैध धंधा अब पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। ड्रग्स सप्लायर पुलिस से बचने के लिए वॉट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बेहद सीक्रेट ग्रुप्स बनाकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं। इन ग्रुप्स में शामिल ग्राहक को केवल चैट का स्क्रीनशॉट दिखाना होता है और उसे नशा मिल जाता है। मिजोरम एक्साइज एंड नारकोटिक्स विभाग के संयुक्त आयुक्त पीटर जोहमिंगथांगा के अनुसार, स्थानीय कूरियर इस अवैध धंधे में ‘आइस’ और ‘कैंडी’ जैसे गुप्त कोड वर्ड्स का इस्तेमाल कर धड़ल्ले से ड्रग्स की होम डिलीवरी कर रहे हैं।
मरीजों की संख्या में भारी उछाल
सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक, मिजोरम में सिंथेटिक ड्रग्स की लत बेहद तेजी से महामारी का रूप ले रही है। आइजोल में महज डेढ़ महीने (10 अप्रैल से 28 मई) के भीतर ही सिंथेटिक ड्रग्स के 239 नए गंभीर मरीज सामने आ चुके हैं, जो स्थिति की भयावहता को साफ बयां करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जो लोग पहले सिर्फ शराब या गांजे का सेवन करते थे, वे अब इस जानलेवा केमिकल ड्रग्स की गिरफ्त में आ चुके हैं। मिजोरम से होकर यह नशा न केवल भारत के अन्य राज्यों, बल्कि बांग्लादेश और अरब देशों तक कूटनीतिक रास्तों से स्मगल किया जा रहा है।
‘ऑपरेशन जेरिको’ से पलटवार
जब सरकारी तंत्र इस आपदा के आगे बेबस नजर आने लगा, तो मिजो समाज की सदियों पुरानी निस्वार्थ सेवा की परंपरा “Tlawmngaihna” जाग उठी। चर्च और स्थानीय समुदायों के सहयोग से 5 लाख वॉलेंटियर्स वाले संगठन वाईएमए ने पुलिस के साथ मिलकर सितंबर 2025 में ‘ऑपरेशन जेरिको’ की शुरुआत की। चंफाई के 13 सबसे संवेदनशील सीमावर्ती गांवों में ये वॉलेंटियर्स तैनात हैं, जो अपने खुफिया इनपुट के आधार पर छापेमारी करवाते हैं और पीड़ितों को रिहैब सेंटर पहुंचाते हैं। हालांकि, इस कड़ाई के बाद तस्करों ने अब मिजोरम के बजाय मणिपुर रूट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
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