Sarpdansh Ghotala : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा प्रशासनिक घोटाला सामने आया है। यहां सरकारी आपदा राहत कोष से मिलने वाले सर्पदंश (सांप काटने) के मुआवजे में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। सचिव स्तर की उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट में यह बात प्रमाणित हुई है कि आम मौतों और जहर खाकर आत्महत्या करने वाले मामलों को जानबूझकर सांप काटने से हुई मौत बताया गया। इस पूरे खेल में मोटी रकम ऐंठने के लिए डॉक्टरों, वकीलों, दलालों और कुछ पुलिस अधिकारियों की आपसी मिलीभगत और एक संगठित सिंडिकेट के सक्रिय होने की बात आधिकारिक रूप से सामने आई है।

शुरुआती जांच में सत्रह फर्जी मामले और एफआईआर की तैयारी
इस महाघोटाले की प्रशासनिक जांच में प्रथम दृष्टया 17 ऐसे संदिग्ध मामलों की शत-प्रतिशत पुष्टि हो चुकी है, जो पूरी तरह फर्जी थे। इन चंद मामलों के जरिए ही सरकारी खजाने को करीब 60 लाख रुपये से अधिक का चूना लगाया जा चुका है। इस बड़ी धोखाधड़ी के सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन बेहद सख्त रुख अपना रहा है। शासन के निर्देश पर बिलासपुर पुलिस और प्रशासन मिलकर इस मामले में संलिप्त 15 से अधिक मुख्य आरोपियों के खिलाफ नामजद आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज कराने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इसमें कई डॉक्टरों और वकीलों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

विधानसभा में गूंजा मुद्दा और फर्जी दस्तावेजों का खेल
दरअसल, भ्रष्टाचार के इस संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ तब हुआ जब बेलतरा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक सुशांत शुक्ला ने इस गंभीर विषय को छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रमुखता से उठाया। विधायक की शिकायत और भारी जन-आक्रोश के बाद शासन ने मामले की गहराई से जांच के आदेश दिए। जांच में यह कड़वी सच्चाई सामने आई कि बिचौलियों ने डॉक्टरों के साथ मिलकर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट, हेरफेर की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इलाज के झूठे अस्पताल रिकॉर्ड तैयार किए थे। इन फर्जी कागजातों को असली बताकर जिला प्रशासन के सामने मुआवजे के दावे ठोक दिए गए और सरकारी राशि हड़प ली गई।
जांच एजेंसी का अनुमान: यह 60 लाख रुपये का आंकड़ा तो महज एक शुरुआत है। जैसे-जैसे फाइलों की परतें खुलेंगी, घोटाले का वास्तविक आकार कई गुना बड़ा हो सकता है।
जशपुर और बिलासपुर के सरकारी आंकड़ों में भारी विसंगति
इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे की सबसे बड़ी कढ़ी दोनों जिलों के आंकड़ों में छिपा अंतर है। छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला, जिसे भौगोलिक रूप से ‘नागलोक’ (सांपों का गढ़) कहा जाता है, वहां सर्पदंश से महज 96 मौतें दर्ज की गईं और सरकार ने लगभग 3 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा। इसके विपरीत, अकेले बिलासपुर जिले में रहस्यमयी ढंग से 431 मौतें सर्पदंश से दिखाकर 17 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि बांट दी गई। इस अस्वाभाविक और विशाल अंतर ने ही राज्य सरकार और शीर्ष अधिकारियों के कान खड़े किए, जिसके बाद इस पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ने के लिए विस्तृत और कड़ा वित्तीय ऑडिट शुरू किया गया।
दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और कड़े नियम बनाने की मांग
सरकारी रिकॉर्ड में की गई इस शर्मनाक हेराफेरी पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सरकार को यह कड़ा सुझाव दिया है कि भविष्य में सर्पदंश के मुआवजे का भुगतान केवल और केवल पूरी तरह से प्रमाणित और डिजिटल रूप से सत्यापित पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाना चाहिए। फिलहाल, प्रशासन इस जालसाजी में शामिल सभी कड़ियों और सफेदपोशों को बेनकाब करने में जुटा है। आने वाले दिनों में बिलासपुर के कई नामचीन डॉक्टरों, वकीलों और राजस्व कर्मचारियों की गिरफ्तारी की पूरी संभावना बनी हुई है।

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