Naxalite Mango Nureti Bari : छत्तीसगढ़ में महिला माओवादी मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी को NIA की स्पेशल कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उसे मामले में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए डीआरजी और एसटीएफ के गवाह आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद विशेष अदालत ने अभियोजन के मामले पर सवाल उठाते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
विशेष न्यायाधीश ने अभियोजन के दावे पर दिया फैसला
NIA की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। अदालत के सामने रखे गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की समीक्षा के बाद मांगो नुरेटी को मामले से बरी करने का निर्णय लिया गया।
नारायणपुर के बारनागुड़ा गांव की रहने वाली है मांगो
मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के बारनागुड़ा क्षेत्र की रहने वाली बताई गई है। पुलिस कार्रवाई के बाद उसका नाम इस मामले में सामने आया था। हालांकि, अदालत में सुनवाई के दौरान उसके खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों की पर्याप्तता को लेकर सवाल बने रहे। कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों को साबित हुआ नहीं माना।
गोलीबारी में शामिल होने का ठोस प्रमाण नहीं मिला
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस मुठभेड़ के दौरान गोलीबारी करने वालों में मांगो नुरेटी के शामिल होने का कोई ठोस और पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आया। इसके अलावा उसकी पहचान से संबंधित साक्ष्यों में भी कमियां पाई गईं। अदालत ने मामले में प्रस्तुत विभिन्न दस्तावेजों और गवाहियों को देखते हुए अभियोजन की कहानी को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक साक्ष्य का परीक्षण किया।
ओडिशा पुलिस की सुपुर्दगी और बरामदगी पर भी सवाल
मामले में आरोपी को ओडिशा पुलिस द्वारा सुपुर्द किए जाने, उसकी कथित चोट और हथियार बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों को लेकर भी अदालत के सामने कमियां सामने आईं। अभियोजन इन बिंदुओं को पर्याप्त साक्ष्यों के साथ स्थापित नहीं कर सका। इन परिस्थितियों का भी मामले के अंतिम फैसले पर असर पड़ा और अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।
12 अप्रैल 2024 को हुई थी पुलिस-माओवादी मुठभेड़
यह मामला 12 अप्रैल 2024 को धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में हुई कथित मुठभेड़ से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, डीआरजी, गरियाबंद डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम माओवादियों के खिलाफ अभियान पर निकली थी। टीम जब एकावारी के जंगल और पहाड़ी इलाके में पहुंची, तभी करीब 20 से 25 माओवादियों ने कथित तौर पर सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया।
पुलिस ने मौके से सामान बरामद करने का दावा किया
पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई के दौरान माओवादी जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग गए। अभियान के बाद सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से बीजीएल सेल, सोलर प्लेट, बिजली के तार, माओवादी यूनिफॉर्म, किताबें और दवाइयां बरामद करने का दावा किया था। इसी ऑपरेशन के दौरान एसटीएफ के आरक्षक सोढ़ी हिंगा के घायल होने की भी जानकारी सामने आई थी।
घायल हालत में घर में छिपने का था पुलिस का दावा
पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के दौरान मांगो नुरेटी के पैर में गोली लगी थी और वह घायल हो गई थी। पुलिस का दावा था कि इसके बाद वह एकावारी गांव में अर्जुन लाल मरकाम के घर में छिपी हुई थी। बाद में ओडिशा पुलिस की डीवीएफ-एसओजी टीम ने 20 अप्रैल को उसे कथित तौर पर वहां से पकड़ा था।
सबूतों की कमी के कारण अदालत से मिली राहत
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण किया। पहचान, मुठभेड़ में कथित भूमिका, चोट, हथियार बरामदगी और सुपुर्दगी से जुड़े प्रमाणों में पर्याप्तता नहीं मिलने के कारण अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर NIA की स्पेशल कोर्ट ने मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी को बरी कर दिया।
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