Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) कृपाल तुमाने ने एक सनसनीखेज दावा करके राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। तुमाने का दावा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सात सांसद इस समय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सीधे संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि शिंदे गुट द्वारा ‘ऑपरेशन टाइगर’ चलाया जा रहा है, जिसके तहत पिछले एक महीने से इन असंतुष्ट सांसदों के साथ गुप्त चर्चा चल रही है। अब यह बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और आगामी मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ये सभी सांसद पाला बदलकर शिंदे गुट का दामन थाम सकते हैं।

उद्धव ठाकरे का दोटूक बयान
इस बड़े राजनीतिक संकट और मीडिया रिपोर्ट्स के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आनन-फानन में अपने सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में उद्धव ठाकरे ने बेहद सख्त और भावुक रुख अपनाते हुए कहा कि अगर कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है, तो उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की जाएगी। वे अपनी मर्जी से खुशी-खुशी जा सकते हैं। वर्ष 2022 में हुई शिवसेना की ऐतिहासिक टूट का जिक्र करते हुए उद्धव ने कहा कि उस समय भी उन्हें बगावत की पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी भी विधायक या नेता पर जबरन रुकने का दबाव नहीं बनाया था। वे आज भी अपनी इसी नीति पर कायम हैं।

संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री से मुलाकात
इस सियासी घमासान के बीच यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से शिवसेना (यूबीटी) के नवनिर्वाचित सांसद संजय देशमुख की एक गतिविधि ने इन कयासों को और हवा दे दी है। संजय देशमुख ने सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात की। चौंकाने वाली बात यह है कि देशमुख ने एक दिन पहले हुई उद्धव ठाकरे की महत्वपूर्ण बैठक में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया था और इसके पीछे उन्होंने अपने पारिवारिक कारणों का हवाला दिया था। हालांकि, पार्टी के बड़े नेताओं का कहना है कि इस मुलाकात को पूरी तरह से शिष्टाचार भेंट के तौर पर देखा जाना चाहिए और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
संजय राउत ने दावों को किया खारिज
उधर, शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शिंदे गुट के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पार्टी के सभी सांसद मजबूती से उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं और टूट की खबरें पूरी तरह से भ्रामक और मनगढ़ंत हैं। शिंदे गुट के नेता पर तंज कसते हुए राउत ने कहा कि कृपाल तुमाने कौन हैं? महाराष्ट्र की राजनीति में उनका ऐसा कोई बड़ा वजूद या नाम नहीं है कि उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने दावा किया कि चार दिन पहले हुई बैठक में सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर अटूट भरोसा जताया था और कुछ नेताओं ने तो अपने परिजनों की कसम खाकर वफादार रहने की बात कही थी।
हाजिरी को लेकर मीडिया के अलग दावे
भले ही संजय राउत पार्टी में सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहे हों, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की अंदरूनी कहानियां कुछ और ही बयां कर रही हैं। खबरों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई इस आपातकालीन बैठक में कुल सांसदों में से केवल 4 सांसद ही शारीरिक रूप से उपस्थित हुए थे, जबकि एक सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑनलाइन जुड़े। शेष 4 सांसद इस महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह नदारद रहे। सांसदों की यह अनुपस्थिति इस बात की ओर साफ इशारा कर रही है कि उद्धव ठाकरे के खेमे के भीतर अंदरूनी असंतोष गहरा है और शिंदे गुट के ‘ऑपरेशन टाइगर’ के दावों में कहीं न कहीं दम जरूर है।
चार साल पहले की वह ऐतिहासिक टूट
महाराष्ट्र में शिवसेना के भीतर बगावत का इतिहास काफी पुराना और गहरा है। इसकी शुरुआत 20 जून 2022 को हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ एकनाथ शिंदे ने बगावत का बिगुल फूंक दिया था। तब शिवसेना के 55 में से 40 विधायक शिंदे के साथ चले गए थे। तत्कालीन राज्यपाल द्वारा फ्लोर टेस्ट का आदेश दिए जाने और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 30 जून 2022 को एकनाथ शिंदे ने भाजपा के समर्थन से नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। बाद में चुनाव आयोग ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शिंदे गुट को ही असली शिवसेना मानते हुए पार्टी का नाम और तीर-कमान का चुनाव चिह्न उन्हें सौंप दिया था।











