Paper Leak Controversy : पेपर लीक पर घनश्याम तिवाड़ी का बड़ा बयान, धर्मेंद्र प्रधान को बताया बधाई का पात्र

Paper Leak Controversy : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को लगातार घेर रहा है और देश के कई हिस्सों में छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी राजनीतिक घमासान के बीच राजस्थान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सबको चौंका दिया है। जहां कांग्रेस और अन्य प्रमुख विपक्षी दल इस बड़ी धांधली के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं, वहीं घनश्याम तिवाड़ी ने इसके ठीक विपरीत शिक्षा मंत्री की जमकर पीठ थपथपाई है और उन्हें बधाई का पात्र बताया है।

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लीक और कंप्रोमाइज का अनोखा तर्क

सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ देते हुए तर्क दिया कि नीट परीक्षा का पेपर कतई लीक नहीं हुआ है, बल्कि यह पेपर केवल ‘कम्प्रोमाइज’ (प्रभावित) हुआ है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि जैसे ही सरकार को पेपर कंप्रोमाइज होने की जरा सी भी भनक या प्रारंभिक सूचना मिली, शिक्षा मंत्री ने बिना कोई वक्त गंवाए एक बेहद साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने न सिर्फ पूरी परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया, बल्कि देश भर के लाखों पीड़ित अभ्यर्थियों की आर्थिक सहूलियत को ध्यान में रखते हुए उनकी पूरी फीस वापस करने और आगामी दोबारा परीक्षा के लिए निशुल्क और पुख्ता इंतजाम करने का बड़ा फैसला लिया। ऐसे संवेदनशील कदमों के लिए वे सराहना के हकदार हैं।

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हूबहू सवाल न आने का दावा

अपने इस अनोखे और नए दावे को और अधिक स्पष्ट करते हुए भाजपा सांसद ने ‘लीक’ और ‘कंप्रोमाइज’ के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी परीक्षा का पेपर तब लीक माना जाता है, जब परीक्षा से पहले ही सारे के सारे सवाल हूबहू बाहर आ जाएं और आम हो जाएं, लेकिन नीट के मामले में ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ है। तिवाड़ी के अनुसार, यहां केवल कुछ चुनिंदा छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर कुछ सवालों को रट लिया और फिर उन रटे हुए सवालों को डिजिटल माध्यम से केरल से लेकर राजस्थान तक के कुछ छात्रों को भेज दिया। ऐसे में इसे पूर्ण रूप से पेपर लीक का नाम देना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से पूरी तरह गलत है, यह महज एक कंप्रोमाइज्ड मामला है।

राहुल गांधी के कोटा दौरे पर तीखा प्रहार

घनश्याम तिवाड़ी ने नीट मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी अपने निशाने पर लिया। उन्होंने राहुल गांधी के राजस्थान के कोचिंग हब कहे जाने वाले कोटा शहर में होने वाले छात्र संवाद कार्यक्रम को लेकर तीखा तंज कसा। तिवाड़ी ने कहा कि यह बेहद हास्यास्पद है कि जो पेपर असल में कभी लीक ही नहीं हुआ, उसे मुद्दा बनाकर राहुल गांधी पूरे देश में घूम-घूमकर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं और राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। कोटा का यह दौरा भी उसी भ्रामक राजनीति का एक हिस्सा मात्र है, जिसका जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

कांग्रेस के पुराने शासनकाल की याद दिलाई

कोटा में छात्रों के बीच जाने से पहले राहुल गांधी को नसीहत देते हुए राज्यसभा सांसद ने राजस्थान के पुराने राजनीतिक इतिहास और कांग्रेस के शासनकाल को याद करने की सलाह दी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि राहुल गांधी को कोटा में कदम रखने से पहले अपनी ही पिछली सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड देख लेना चाहिए, जिसके राज में राजस्थान में दर्जनों प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर धड़ल्ले से लीक हुआ करते थे और युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेला जाता था। इसके विपरीत, वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सुशासन में पेपर लीक माफियाओं पर कड़ा शिकंजा कसा गया है और उनके राज में एक भी पेपर लीक होने की घटना सामने नहीं आई है। ऐसे में राहुल गांधी का यहां आकर छात्रों से हमदर्दी जताना बेमानी है।

संवाद कार्यक्रम का राजनीतिक असर शून्य

अपने बयान के अंतिम हिस्से में घनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस की इस पूरी राष्ट्रव्यापी मुहिम के राजनीतिक भविष्य पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और यहां हर राजनीतिक दल तथा नेता को जनता के बीच जाने और विरोध प्रदर्शन या संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पहले भी इस तरह के ढेरों विफल कार्यक्रम और यात्राएं कर चुके हैं। लेकिन देश के छात्र और जागरूक युवा भली-भांति जानते हैं कि कौन उनके भविष्य के लिए गंभीर है और कौन केवल राजनीति कर रहा है। इसलिए राहुल गांधी चाहे जितने भी संवाद कार्यक्रम कर लें, इससे उन्हें या उनकी पार्टी कांग्रेस को कोई राजनीतिक फायदा होने वाला नहीं है।

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Chandan Das

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