CBSE Scanned Copy Delay : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली इन दिनों विवादों के केंद्र में है। एक तरफ जहां सरकार द्वारा गठित समिति टेंडर प्रक्रिया की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) का इंतजार कर रहे हजारों छात्रों की धड़कनें बढ़ गई हैं। विवाद तब और गहरा गया जब इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार कंपनी ‘Coempt Edu Teck’ ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया। कंपनी के इस खुलासे के बाद कि अभी भी 5 प्रतिशत छात्रों को उनकी स्कैन की गई कॉपियां नहीं मिल पाई हैं, शिक्षा जगत में नई बहस छिड़ गई है। छात्रों और अभिभावकों का मानना है कि सीबीएसई की यह सुस्ती उनके करियर और भविष्य के लिए गंभीर संकट खड़ा कर रही है।

95 फीसदी कॉपियां उपलब्ध होने का कंपनी का दावा
कंपनी ‘Coempt Edu Teck’ ने अपने हालिया बयान में सफाई देते हुए कहा है कि आवेदन करने वाले लगभग 95 प्रतिशत छात्रों को उनकी 12वीं की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों को धुंधली तस्वीरों या लिखावट स्पष्ट न दिखने जैसी शिकायतें थीं, उन पर भी समीक्षा की जा रही है। कंपनी का दावा है कि शेष 5 प्रतिशत छात्रों को कॉपियां उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, तकनीकी रूप से यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन यदि संख्यात्मक दृष्टि से देखें तो यह करीब 20,000 छात्र हैं, जिनका भविष्य अभी भी बीच मझधार में लटका हुआ है।

स्कैन कॉपी के अभाव में री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया रुकी
सीबीएसई के नियमानुसार, री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने हेतु पहले छात्र को अपनी स्कैन कॉपी देखना अनिवार्य होता है। जब तक छात्र के पास अपनी कॉपी नहीं होगी, वह यह तय ही नहीं कर पाएगा कि उसे किन प्रश्नों में त्रुटि या अंक कम मिलने की शिकायत दर्ज करानी है। ऐसे में, यदि 5 प्रतिशत छात्रों को अभी तक कॉपियां ही नहीं मिली हैं, तो उनका री-इवैल्यूएशन प्रोसेस कब और कैसे शुरू होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। इस तकनीकी बाधा के कारण उन छात्रों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है, जो अपने अंकों में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
जोसा काउंसलिंग और यूनिवर्सिटी दाखिलों पर संकट के बादल
सीबीएसई की ओर से इस मामले में बरती जा रही चुप्पी छात्रों के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब बनी हुई है। देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले के लिए ‘जोसा’ (JoSAA) काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन की समय सीमा भी करीब है। इन सभी प्रक्रियाओं के लिए छात्रों को संशोधित मार्कशीट की आवश्यकता होगी। यदि री-इवैल्यूएशन का परिणाम समय पर नहीं आया, तो हजारों छात्र काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। सीबीएसई की इस ‘मौन’ नीति ने छात्रों में भारी आक्रोश और बेचैनी पैदा कर दी है, क्योंकि उनका पूरा अकादमिक साल दांव पर लगा है।
क्या समय पर मिल पाएगा छात्रों को न्याय?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई को इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कदम उठाने चाहिए। यदि 5 प्रतिशत छात्रों की कॉपियां उपलब्ध नहीं हैं, तो बोर्ड को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि री-इवैल्यूएशन और रिजल्ट समय पर जारी हो सके। छात्रों का भविष्य किसी भी तकनीकी विवाद या कंपनी की विफलता का शिकार नहीं होना चाहिए। अब सबकी निगाहें सीबीएसई के अगले कदम और सरकार की उस जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे टेंडर विवाद की समीक्षा कर रही है।
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