Israel Lebanon Conflict : पश्चिम एशिया के अशांत माहौल के बीच वैश्विक राजनीति से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां लंबे समय से जारी तनाव के बाद आखिरकार ईरान और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता संपन्न हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ इस समझौते के बाद युद्ध के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों ने इस बात की सबसे पहले पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच समझौते के अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इस महत्वपूर्ण समझौते पर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हस्ताक्षर किए हैं, जबकि ईरान की ओर से वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर कलिबाफ ने अपनी आधिकारिक सहमति जताते हुए दस्तखत किए हैं।

इजरायली कार्रवाई पर बिधके डोनाल्ड ट्रंप
शांति समझौते की इस ऐतिहासिक सफलता के बीच, दूसरी तरफ इजरायल की ओर से की गई हालिया उकसावे वाली सैन्य कार्रवाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेहद नाराज कर दिया है। ट्रंप ने खुले तौर पर लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे पूरी तरह से गलत ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इजरायल के इस अप्रत्याशित और आक्रामक कदम से बेहद नाखुश हैं। ट्रंप ने माना कि जब अमेरिका क्षेत्र में शांति बहाली के लिए ईरान के साथ इतनी बड़ी कूटनीतिक डील को अंतिम रूप दे रहा था, ठीक उसी वक्त इजरायल का यह हमला पूरे किए-कराए पर पानी फेर सकता था। इसी के चलते उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सख्त लहजे में नसीहत दी है।

पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को कड़ी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें लेबनान के मामले में अब बहुत ज्यादा जिम्मेदार और गंभीर होना पड़ेगा। ट्रंप का मानना है कि यदि इजरायल भविष्य में लेबनान पर कोई भी सैन्य कार्रवाई या हमला करता है, तो भी अमेरिका और ईरान के बीच हुई यह ऐतिहासिक डील बरकरार रहनी चाहिए और इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि ईरान समझौते की घोषणा से ठीक पहले इजरायल की तरफ से जो हमला किया गया, वह टाइमिंग और रणनीति के लिहाज से उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आया। ट्रंप ने नेतन्याहू को भविष्य के लिए लेबनान के संवेदनशील मुद्दे पर अत्यधिक समझदारी और संयम बरतने की साफ सलाह दे डाली है।
ईरान डील की सफलता का पूरा भरोसा
ईरान के साथ हुए इस समझौते पर अपनी बात रखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गर्व से कहा कि ईरान के साथ हमारी बहुप्रतीक्षित डील अब पूरी तरह से फाइनल हो चुकी है। यह वैश्विक शांति के लिए बेहद जरूरी है और इस समझौते को हर हाल में सफल होना ही चाहिए। उन्होंने बताया कि यह पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया अब अपने दूसरे और बेहद महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करने जा रही है, जो उनके मुताबिक पिछले चरणों की तुलना में काफी आसान और प्रभावी होगी। ट्रंप ने अतीत की सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि वे पिछले हफ्ते ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला नहीं करना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन हालातों को देखते हुए हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।
अतीत के सैन्य कदमों का किया खुलासा
ट्रंप ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए एक बड़ा खुलासा किया कि अमेरिका ने असल में दो बार ईरान के खिलाफ कड़े सैन्य कदम उठाए थे। यहां तक कि अमेरिकी सेना तीसरी बार भी ऐसी ही एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पूरी तरह से तैयार खड़ी थी, लेकिन ऐन वक्त पर स्थितियां बदलीं और हमें उस हमले की जरूरत नहीं पड़ी। ट्रंप ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ईरान के साथ वर्तमान में किया गया यह नया समझौता दोनों देशों के लिए पूरी तरह से एक निष्पक्ष और पारदर्शी डील है। यह न केवल अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) क्षेत्र को एक विनाशकारी युद्ध की आग में झुलसने से भी बचाता है।
आर्थिक बाध्यताओं से मुक्त है यह डील
समझौते के वित्तीय पहलुओं को लेकर उठ रहे सवालों और आशंकाओं को पूरी तरह से खारिज करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि यह एक बेहद अच्छी और स्मार्ट डील है। उन्होंने देश की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस समझौते के तहत अमेरिकी सरकार ईरान के भीतर किसी भी प्रकार का कोई पैसा निवेश नहीं करने जा रही है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भविष्य में यदि मैं या कोई अन्य अमेरिकी प्रशासन वहां कुछ भी अलग रणनीतिक कदम उठाना चाहे, तो अमेरिका के पास किसी भी दिन ईरान में जाकर अपनी मर्जी के अनुसार कार्रवाई करने का पूरा संप्रभु अधिकार सुरक्षित है।
निवेश की कोई बाध्यता नहीं
अपने विस्तृत बयान के समापन पर राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया कि ईरान की धरती पर अमेरिकी पूंजी या करदाताओं के पैसों को निवेश करने की हमारी कोई भी कानूनी या नैतिक बाध्यता इस समझौते के तहत नहीं है। यह समझौता केवल सुरक्षा, आतंकवाद पर लगाम और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के नियमों पर आधारित है। ऐसे में अमेरिका पूरी तरह से वित्तीय रूप से सुरक्षित है और साथ ही क्षेत्र में शांति स्थापित करने में भी कामयाब रहा है। अब गेंद पूरी तरह से इजरायल के पाले में है कि वह इस शांति प्रक्रिया का सम्मान करे।
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