TMC Leader Arrested : पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब कोलकाता नगर निगम (KMC) के चर्चित पार्षद सुषांत घोष को ओडिशा के पुरी से गिरफ्तार कर लिया गया। सुषांत घोष, जो कि टीएमसी के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं, पर लंबे समय से वसूली, भ्रष्टाचार और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लग रहे थे। बुधवार को एक अत्यंत गोपनीय और सुनियोजित ऑपरेशन के तहत कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और ओडिशा पुलिस की संयुक्त टीम ने उन्हें पुरी में उनके ठिकाने से धर दबोचा। इस गिरफ्तारी के बाद से ही कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है, क्योंकि सुषांत घोष टीएमसी के एक बड़े चेहरे के रूप में जाने जाते थे।

वसूली रैकेट और जालसाजी में दर्ज थी प्राथमिकी
पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, सुषांत घोष के खिलाफ कई थानों में वसूली (Extortion), जान से मारने की धमकी देने, सरकारी धन के भ्रष्टाचार और दस्तावेजों में हेरफेर करने यानी जालसाजी (Forgery) से जुड़ी कई FIR दर्ज थीं। बताया जा रहा है कि शहर में एक संगठित वसूली रैकेट चलाने का उन पर आरोप है। इस मामले में पुलिस ने जब शिकंजा कसना शुरू किया, तो सुषांत घोष जांच से बचने के लिए कोलकाता से फरार हो गए थे। तब से पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी और उनके छिपने के संभावित ठिकानों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जो लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थी।

खुफिया इनपुट और संयुक्त ऑपरेशन के जरिए मिली सफलता
गिरफ्तारी की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें सुषांत घोष की मौजूदगी के बारे में विशेष खुफिया सूचना (Secret Input) मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर कोलकाता पुलिस की STF ने ओडिशा पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया और पुरी में जाल बिछाया। जैसे ही सुषांत घोष की सटीक लोकेशन ट्रैक हुई, संयुक्त टीम ने दबिश देकर उन्हें हिरासत में ले लिया। फिलहाल, गिरफ्तारी के बाद कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में कोलकाता लाया जा रहा है, जहां उन्हें अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी।
विवादों से पुराना नाता और पद से इस्तीफा
सुषांत घोष का विवादों से पुराना नाता रहा है। उनकी गिरफ्तारी का यह मामला केवल एक घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से उनके खिलाफ उठ रही शिकायतों का परिणाम है। गौर करने वाली बात यह है कि इन गंभीर आरोपों के चलते पिछले महीने ही उन्हें कोलकाता नगर निगम के बरो-12 (Borough-12) के चेयरमैन पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, इस्तीफा देने के बावजूद वह अपने वार्ड के पार्षद बने हुए थे। उनकी गिरफ्तारी से अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में उनकी पार्षद सदस्यता पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं। इस पूरी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून किसी को भी नहीं बख्शने वाला है, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो। फिलहाल, पूरे मामले पर टीएमसी नेतृत्व की ओर से किसी भी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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