US-Iran Deal : महीनों के तनावपूर्ण संघर्ष और सैन्य टकराव के बाद, अंततः अमेरिका और ईरान के बीच शांति का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक महत्वपूर्ण शांति समझौते (एमओयू) पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच जारी कड़वाहट को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में परमाणु कार्यक्रम संबंधी चिंताओं को कम करना और क्षेत्र को एक व्यापक युद्ध की विभीषिका से बचाना है। हालाँकि, यह खबर जहां वैश्विक शांति की दृष्टि से राहत भरी है, वहीं इजरायल की राजनीति और विशेष रूप से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

नेतन्याहू की राजनीतिक साख के लिए बड़ा झटका
अमेरिका-ईरान डील के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। व्यक्तिगत और कूटनीतिक स्तर पर इस समझौते को नेतन्याहू की एक बड़ी विफलता के रूप में देखा जा रहा है। इजरायल के पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘कान’ (Kan) द्वारा हाल ही में किए गए एक जनमत सर्वेक्षण से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे में भाग लेने वाले इजरायली नागरिकों में इस समझौते के प्रति भारी असंतोष है। केवल 18 प्रतिशत लोगों ने ही इस शांति डील का समर्थन किया, जबकि 55 प्रतिशत नागरिकों ने स्पष्ट रूप से इसका विरोध दर्ज कराया है। यह डेटा इजरायल के भीतर नेतन्याहू के नेतृत्व और उनकी विदेश नीति के प्रति बढ़ते अविश्वास को दर्शाता है।

सुरक्षा को लेकर इजरायली जनता के मन में अब भी भय
सर्वेक्षण में एक और चिंताजनक पहलू यह निकलकर आया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर किए गए हालिया हमलों के बावजूद, इजरायली जनता का भय कम नहीं हुआ है। सर्वे में शामिल 70 प्रतिशत लोगों का मानना है कि समझौता होने के बाद भी उन्हें ईरान से सुरक्षा खतरा महसूस होता है। यह स्पष्ट करता है कि शांति डील के कागजी हस्ताक्षर इजरायली नागरिकों के मन से सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने में विफल रहे हैं। लोगों को लगता है कि ईरान की सैन्य क्षमता और उसका क्षेत्रीय प्रभाव अभी भी इजरायल के अस्तित्व के लिए एक संभावित चुनौती बना हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप की बदलती छवि और इजरायल-अमेरिका संबंधों का भविष्य
इस समझौते के बाद अमेरिका के साथ इजरायल के भविष्य को लेकर भी असमंजस की स्थिति है। सर्वेक्षण में शामिल 40 प्रतिशत लोगों ने अभी भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का एक वफादार दोस्त माना है। हालांकि, 32 प्रतिशत नागरिकों को यह आशंका सता रही है कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद इजरायल के प्रति ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव आ सकता है। यह चिंता इस बात की ओर इशारा करती है कि इजरायली जनता अपने सबसे बड़े सहयोगी देश के साथ संबंधों में एक नई और अनिश्चित कूटनीतिक चाल को महसूस कर रही है।
शांति के दावे और धरातल पर अनिश्चितताएं
इस समझौते का घोषित मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना और परमाणु कार्यक्रमों को नियंत्रित करना है, लेकिन सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि धरातल पर अभी भी बहुत कुछ अनिश्चित है। इजरायल में 27 प्रतिशत लोग ऐसे भी मिले जो इस पूरे घटनाक्रम पर तटस्थ रहे या जिनकी कोई राय नहीं थी, जो यह दर्शाता है कि इजरायली समाज फिलहाल इस बड़े बदलाव के प्रभावों को समझने की प्रक्रिया में है। बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह शांति समझौता एक दोधारी तलवार साबित हो रहा है, जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी ओर उनके ही देश की जनता का बढ़ता हुआ विरोध और असुरक्षा का भाव।
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