US Iran Tensions : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए दावा किया है कि तेहरान अब एक सैन्य शक्ति के रूप में लगभग ‘खत्म’ हो चुका है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कई पोस्ट के जरिए ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया संघर्षों ने ईरान की एयर फोर्स, नेवी, रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह तबाह कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि ईरान के पास अब रक्षा के लिए कोई भी प्रभावी उपकरण शेष नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों, विशेषकर डेमोक्रेट्स की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की कि ईरान पहले की तुलना में अधिक मजबूत है। ट्रंप के अनुसार, यह दावा पूरी तरह से आधारहीन है और सच्चाई यह है कि ईरान अब अत्यंत कमजोर स्थिति में है।

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत की शर्तों पर स्पष्टीकरण
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत की पहल ईरान की तरफ से की गई थी, न कि अमेरिका की ओर से। उन्होंने कहा कि तेहरान हताशा के कारण वार्ता के लिए आगे आया है, क्योंकि उसकी सैन्य ताकतें पूरी तरह से बिखर चुकी हैं। राष्ट्रपति ने घोषणा की है कि ईरान को अमेरिका की ओर से एक भी पैसा (सेंट) नहीं मिलेगा। उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान पर जारी दबाव की नीति के परिणाम सामने आ रहे हैं। इस मुद्दे पर चल रही घरेलू बहस के बीच ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका अपने तय लक्ष्यों पर अडिग रहेगा और तेहरान को किसी भी प्रकार की वित्तीय राहत प्रदान नहीं की जाएगी। उन्होंने आगामी 60 दिनों के दौरान बेहद सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी है।

14-पॉइंट मेमोरेंडम और ईरान-अमेरिका संघर्ष का संभावित अंत
इस कूटनीतिक हलचल के बीच, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बुधवार शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने 14-पॉइंट वाले एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य 28 फरवरी से चल रहे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच के युद्ध को समाप्त करना है। इस शांति प्रक्रिया में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और उन्होंने भी इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते की शर्तों के अनुसार, ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत फिर से खोलना होगा, जिसके बदले में अमेरिका अपनी नेवल नाकाबंदी को हटा लेगा।
60 दिनों की कूटनीतिक समयसीमा और न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अनिश्चितता
इस मेमोरेंडम के तहत दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक बातचीत चलेगी, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इस बातचीत का मुख्य केंद्र ईरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम (न्यूक्लियर प्रोग्राम) पर एक स्थायी समझौता करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर चर्चा करना है। हालांकि ट्रंप का सख्त रुख यह संकेत देता है कि वित्तीय राहत मिलना फिलहाल दूर की कौड़ी है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि दबाव की यही नीति ईरान को एक स्थायी समझौते की मेज पर लाने में सफल रही है। अब आने वाले दो महीने यह तय करेंगे कि क्या यह युद्ध विराम एक स्थायी शांति में बदल पाएगा या ईरान पर आर्थिक दवाब की यह नीति और भी अधिक तीव्र होगी।
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