Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की सियासत इन दिनों बेहद उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रही है। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना पर मंडराते संकट के बीच, पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय के माध्यम से संजय राउत ने राज्य की महायुति सरकार पर जोरदार हमला बोला है। हाल ही में शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने के बाद से राज्य में राजनीतिक पारा चरम पर है। संजय राउत ने अपने संपादकीय में महाराष्ट्र के सामने खड़े गंभीर मुद्दों का जिक्र करते हुए सरकार पर जनहित की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

‘गद्दारी का सफल ऑपरेशन’: फडणवीस-शिंदे पर कटाक्ष
संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के बीच की कथित खटास पर तंज कसते हुए कहा कि विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या पर उनकी जारी तस्वीर ही आपसी मतभेदों की गवाह है। राउत ने फडणवीस के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने शिवसेना में हुई टूट को ‘सफल ऑपरेशन’ बताया था। संपादकीय में लिखा गया है कि मुख्यमंत्री इसे प्रसव और गद्दारों का जन्म बताकर जश्न मना रहे हैं, जिसे सफल बनाने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। राउत ने तीखे शब्दों में पूछा कि आखिर इन ‘छह गद्दारों’ के असली राजनीतिक माता-पिता कौन हैं, जिस पर अब संशोधन (शोध) करने की आवश्यकता है।

जल संकट और किसानों की बदहाली का मुद्दा
राउत ने सरकार को घेरते हुए कहा कि महाराष्ट्र इस समय भीषण सूखे और पानी की कमी से जूझ रहा है। बांधों और जलाशयों का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में पलायन का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सांसदों को तोड़ने में खर्च किया गया धन सूखाग्रस्त किसानों के काम नहीं आ सकता था? राउत के अनुसार, राज्य में किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला थमा नहीं है और सरकार मवेशियों के चारे-पानी के संकट को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने ‘लाड़ली बहना’ योजना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने बहनों को भी भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
नीट पेपर लीक और लोकतांत्रिक मूल्यों का पतन
संपादकीय में नीट (NEET) पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए राउत ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पकड़े गए लोग सीधे तौर पर भाजपा परिवार से जुड़े हैं, इसलिए विपक्ष को इस पर सरकार से जवाब तलब करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने महाराष्ट्र में विधानसभा के दोनों सदनों में विपक्ष का नेता न होने को लोकतंत्र का पतन करार दिया। राउत ने दावा किया कि सत्ताधारी दल विपक्ष के सवालों से डरते हैं, इसलिए उन्होंने जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा की है।
भविष्य के लिए चेतावनी और भ्रष्ट सांठ-गांठ
अंत में, संजय राउत ने चेतावनी दी कि एकनाथ शिंदे की राजनीति और धन का अहंकार आने वाले समय में खुद देवेंद्र फडणवीस के लिए भी मुश्किलें पैदा करेगा। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली का एक गुट जानबूझकर फडणवीस के खिलाफ शिंदे को शह दे रहा है। राउत ने निष्कर्ष निकाला कि शिंदे और फडणवीस की भ्रष्ट सांठ-गांठ ने महाराष्ट्र को 25 साल पीछे धकेल दिया है, जिससे राज्य की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। उन्होंने जोर दिया कि जनता इन तमाम सवालों का जवाब मांग रही है, जिन्हें सरकार केवल फोटो-सेशन और जश्न के शोर में दबाने की कोशिश कर रही है।










