Middle East Tension : हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला दावा सामने आया है, जिसने सुरक्षा विशेषज्ञों और वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। ब्राजील के प्रतिष्ठित जियो-स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट और पत्रकार पेपे एस्कोबार ने आरोप लगाया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उनके आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की हत्या की एक गहरी साजिश रची थी। एस्कोबार के अनुसार, यह कथित साजिश उस समय रची गई थी, जब आसिम मुनीर एक शांति वार्ता में भाग लेने के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में मौजूद थे। इस दावे ने न केवल पाकिस्तान और इजरायल के बीच के तनाव को रेखांकित किया है, बल्कि मध्य-पूर्व की नाजुक राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
खुफिया एजेंसी को मिली थी साजिश की भनक
पेपे एस्कोबार ने अपने खुलासे में आगे कहा कि पाकिस्तानी सैन्य खुफिया एजेंसी को इस साजिश के बारे में बेहद पुख्ता और भरोसेमंद जानकारी प्राप्त हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस गुप्त सूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीधे आदेशों पर मोसाद, जिनेवा में होने वाली एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान जनरल मुनीर और उनके साथ मौजूद पाकिस्तानी अधिकारियों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा था। एस्कोबार का तर्क है कि इजरायली नेतृत्व ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया की कड़े शब्दों में आलोचना की थी और इस शांति समझौते में शामिल न किए जाने से इजरायल बेहद नाराज था।
पाकिस्तानी मीडिया ने दावों को किया खारिज
हालांकि, इस दावे के सार्वजनिक होते ही पाकिस्तानी पत्रकारिता जगत से विपरीत प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई पाकिस्तानी पत्रकारों ने एस्कोबार के इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे महज अटकलबाजी करार दिया है। पाकिस्तान वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसके तहत एक प्रारंभिक ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर चर्चा चल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील दावे क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ने और गलतफहमियां पैदा करने के उद्देश्य से भी फैलाए जा सकते हैं।
सैन्य हमलों और क्षेत्रीय तनाव का प्रभाव
क्षेत्रीय अस्थिरता का असर इस शांति प्रक्रिया पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। लेबनान में इजरायल द्वारा लगातार किए जा रहे सैन्य हमलों के कारण इस नाजुक शांति समझौते के टूटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इजरायल ने अपने रुख को साफ करते हुए कहा है कि वह लेबनान में अपने सैन्य अभियान को तब तक नहीं रोकेगा, जब तक कि उसे ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह से मिलने वाले खतरों का समाधान नहीं मिल जाता। एस्कोबार का दावा है कि इस क्षेत्रीय तनाव के बीच, आसिम मुनीर का स्विट्जरलैंड दौरा मोसाद के निशाने पर था, जो भू-राजनीतिक समीकरणों को एक बेहद खतरनाक दिशा में मोड़ने की कोशिश थी। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
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