Maharashtra Politics : शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक गंभीर खुलासा करते हुए दावा किया है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। राउत का आरोप है कि शिवसेना (शिंदे गुट) के कुछ बागी सांसदों ने उन्हें धमकाते हुए कहा है कि यदि उनके खिलाफ कोई टिप्पणी की गई, तो उन पर बम फेंक दिया जाएगा। इस अत्यंत गंभीर घटना को लेकर राउत ने मुंबई पुलिस आयुक्त देवेंद्र भारती को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आग्रह किया है।

राउत का तीखा हमला: ‘क्या एकनाथ शिंदे ने बम की फैक्ट्री बनाई है?’
पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय राउत ने इन धमकियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जोड़ते हुए सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन बागी नेताओं के पास बम जैसी घातक सामग्री आखिर आई कहाँ से? उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए पूछा, “क्या शिंदे ने बम बनाने की कोई फैक्ट्री खोल रखी है?” राउत ने इसे राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताया और कहा कि वे इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और जरूरत पड़ने पर जनता के बीच जाकर आंदोलन भी करेंगे।

‘देश में पिछले 12 सालों से घोषित आपातकाल का माहौल’
संजय राउत ने एनसीईआरटी की पुस्तकों में आपातकाल (इमरजेंसी) के विषय को शामिल करने के निर्णय पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने तर्क दिया कि आपातकाल कोई किताबी पढ़ाई का विषय नहीं, बल्कि एक व्यवस्था है। राउत ने आरोप लगाया कि वर्तमान में देश में पिछले 12 वर्षों से अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी की पार्टी तोड़ने या संविधान को खत्म करने का काम नहीं किया था। उनके अनुसार, संघ के नेताओं को जेल में रहने के दौरान भी इंदिरा सरकार ने फाइव स्टार सुविधाओं जैसी व्यवस्था मुहैया कराई थी।
‘संविधान विरोधी है सरकार का रवैया’
संसद के विशेष सत्र और संवैधानिक व्यवस्थाओं पर बात करते हुए राउत ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि संविधान में देश की विपरीत स्थितियों से निपटने के लिए आपातकाल जैसे प्रावधान पहले से मौजूद हैं। उन्होंने नोटबंदी और कोरोना काल में लागू किए गए एपिडेमिक एक्ट का हवाला देते हुए सरकार से सवाल किया कि आखिर वे संविधान में विश्वास क्यों नहीं रखते? उन्होंने स्पष्ट किया कि बालासाहेब ठाकरे ने भी उस दौर की अराजकता को देखते हुए आपातकाल का समर्थन किया था, क्योंकि उस समय बीजेपी के नेता खुलेआम सरकार को चुनौती दे रहे थे और जनता को गुमराह कर रहे थे।
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