Strait of Hormuz : ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बेहद महत्वाकांक्षी और विवादास्पद योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। अमेरिका-ईरान के बीच हालिया संघर्ष के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोल दिया गया है, लेकिन अब तेहरान यहाँ से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से शुल्क (ट्रांजिट फीस) वसूलने की तैयारी में है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान का लक्ष्य इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के प्रबंधन के नाम पर सालाना लगभग 40 अरब डॉलर की कमाई करना है। इसके लिए ईरान अपने पड़ोसी खाड़ी देशों, विशेषकर ओमान के साथ लगातार चर्चा कर रहा है ताकि एक स्थायी राजस्व मॉडल तैयार किया जा सके। तेहरान का तर्क है कि यह राशि यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सेवाएं प्रदान करने के खर्च के रूप में ली जाएगी।

तुर्की के मॉडल से प्रेरणा और अंतरराष्ट्रीय कानूनी चुनौतियां
ईरान अपनी इस नई व्यवस्था को कानूनी जामा पहनाने के लिए तुर्की द्वारा ‘डार्डानेल्स जलडमरूमध्य’ (Dardanelles Strait) के प्रबंधन का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। तुर्की 1936 के ‘मोंट्रो कन्वेंशन’ के तहत वहां से गुजरने वाले जहाजों से प्रकाश स्तंभ (लाइटहाउस), बचाव अभियान और स्वच्छता सेवाओं के नाम पर शुल्क लेता है। ईरानी अधिकारी इसी तर्ज पर होर्मुज के लिए एक नया ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार करना चाहते हैं। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि होर्मुज का प्रबंधन अब पहले जैसा नहीं रहेगा और इसमें व्यापक बदलाव अनिवार्य हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई के बजाय ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) से व्यापक सहमति लेनी होगी, क्योंकि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जिस पर किसी भी एक देश का पूर्ण अधिकार नहीं हो सकता।

अमेरिका का कड़ा विरोध और भविष्य के समीकरण
ईरान के इस कदम का अमेरिका ने तीखा विरोध किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोटूक कहा है कि दुनिया के किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के उपयोग के लिए शुल्क लेने का अधिकार नहीं है। अमेरिका के अनुसार, यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते की स्वीकार्य शर्त नहीं हो सकती। वर्तमान में, अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य शुरुआती 60 दिनों के लिए पूरी तरह टोल-मुक्त रहेगा। दूसरी ओर, ओमान ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसके जलक्षेत्र से होकर गुजरने वाले किसी भी अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर पर कोई ट्रांजिट फीस नहीं लगाई जाएगी और पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संचालित होगी।
वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस व्यापार की ‘धमनी’ माना जाता है। यदि ईरान यहाँ टोल वसूलने में सफल हो जाता है, तो इससे न केवल शिपिंग लागत में भारी वृद्धि होगी, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल भी बन सकता है। चीन सहित कई देश इस योजना पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि उनकी ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर इस मार्ग से जुड़ी है। ईरान की यह कोशिश जहां एक ओर उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक शक्तियों के साथ एक नए टकराव की शुरुआत भी हो सकती है। क्या आप इस विषय पर अधिक जानकारी या अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रभाव के बारे में जानना चाहेंगे?










