Ram Mandir Donation : राम मंदिर चंदे पर नया विवाद, सवालों में उद्धव ठाकरे की चांदी की ईंट और एक करोड़ की रसीद

Ram Mandir Donation : अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान और चढ़ावे की पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इस मामले में शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने एक नया और गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से राउत ने आरोप लगाया है कि शिवसेना द्वारा मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की गई 4 किलोग्राम वजन की चांदी की ईंट का कोई अता-पता नहीं है।

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राउत ने याद दिलाया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में हजारों शिवसैनिकों और संतों की उपस्थिति में न केवल एक करोड़ रुपये की राशि, बल्कि यह पवित्र चांदी की ईंट भी ट्रस्ट को भेंट की गई थी। इतने वर्षों का समय बीत जाने के बाद भी ट्रस्ट द्वारा न तो कोई रसीद जारी की गई है और न ही ईंट की वर्तमान स्थिति के बारे में कोई जानकारी दी गई है। उन्होंने सीधे तौर पर ट्रस्ट से जवाब मांगा है कि आखिर वह पवित्र ईंट कहां गई।

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200 चांदी की ईंटों का हिसाब न मिलने से बढ़ा विवाद

केवल शिवसेना ही नहीं, बल्कि अन्य दानदाताओं ने भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। ‘कासल्स ग्रुप ऑफ कंपनीज’ के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. राजू वी. मनवानी ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने बताया कि सिंधी समुदाय की ओर से 26 जनवरी 2021 को अयोध्या में ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय को एक-एक किलोग्राम वजन की कुल 200 चांदी की ईंटें सौंपी गई थीं। मनवानी का कहना है कि इन ईंटों का अब तक कोई आधिकारिक हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो दानदाताओं के मन में बड़ी शंका पैदा कर रहा है। यह आरोप मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

दानदाताओं का घटता भरोसा और पारदर्शिता की मांग

डॉ. मनवानी ने जोर देकर कहा कि मीडिया में दान में कथित गड़बड़ी की खबरों ने आम जनता और दानदाताओं के बीच बेचैनी बढ़ा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए दान का सही उपयोग हुआ है या नहीं। उन्होंने कहा, “हमने पहले कभी यह सवाल नहीं उठाया कि चांदी का उपयोग कहां किया जाएगा, लेकिन हालिया घटनाओं और गड़बड़ियों की खबरों ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है।” मनवानी के अनुसार, यदि दान की गई वस्तुओं का उपयोग मंदिर निर्माण में नहीं किया गया या उनका कोई हिसाब नहीं मिला, तो भविष्य में लोग मंदिर के लिए दान देने में हिचकिचाएंगे। दानदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए अब मामले की निष्पक्ष जांच और पूरी जवाबदेही तय करना अनिवार्य हो गया है।

ट्रस्ट के लिए बढ़ती चुनौतियां

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। एक तरफ मंदिर की भव्यता चर्चा का विषय है, तो दूसरी तरफ दान में मिली कीमती धातुओं और धन के दुरुपयोग के आरोपों ने ट्रस्ट की छवि को नुकसान पहुंचाया है। संजय राउत और डॉ. मनवानी जैसे लोगों के बयानों ने इस पूरे मामले में ‘श्वेत पत्र’ लाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। अब देखना यह है कि क्या ट्रस्ट इन आरोपों का जवाब देकर दानदाताओं का विश्वास दोबारा जीत पाएगा, या फिर ये अनसुलझे सवाल भविष्य में मंदिर प्रशासन के लिए एक बड़ी बाधा बनेंगे।

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Chandan Das

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