Ram Mandir Donation : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान में मिली कीमती वस्तुओं के गायब होने की खबरों ने हाल ही में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि मंदिर में दान की गई चांदी की ईंटें, कीमती हार और चरण पादुकाएं गायब हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की विस्तृत जांच ने इन तमाम दावों को खारिज कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, SIT को ट्रस्ट द्वारा जो आधिकारिक दस्तावेज सौंपे गए हैं, वे स्पष्ट करते हैं कि मंदिर में आए दान पूरी तरह से सुरक्षित और रिकॉर्ड के अनुसार हैं।

मुंबई के व्यवसायी का दान सुरक्षित, ट्रस्ट ने दी स्पष्टीकरण
SIT की जांच में सबसे पहले मुंबई के व्यवसायी अनिल विश्वकर्मा द्वारा दान में दी गई चांदी के हार और चरण पादुकाओं की स्थिति की पुष्टि की गई। जांच दल ने पाया कि ये सभी वस्तुएं ट्रस्ट की अभिरक्षा में पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसी तरह, ‘विश्व सिन्धी सेवा समाज’ के अध्यक्ष राजू मंडवानी द्वारा 2021 में दान की गई 200 किलोग्राम वजन की आठ चांदी की ईंटों को लेकर जो विवाद पैदा हुआ था, उसे भी सुलझा लिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ईंटें चोरी नहीं हुई थीं, बल्कि उन्हें नियमानुसार ‘सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ को गलाने के लिए भेजा गया था।

आधिकारिक दस्तावेजों से साबित हुई ईंटों की मौजूदगी
जांच दल ने ट्रस्ट और मिंटिंग कॉर्पोरेशन के संयुक्त हस्ताक्षर वाली सूची को सार्वजनिक किया है। इस आधिकारिक सूची के पेज नंबर 1 पर क्रमांक 96 के तहत बॉक्स संख्या 10 से 17 तक का स्पष्ट उल्लेख है, जिसमें चांदी की इन ईंटों के गलाने की पूरी प्रक्रिया दर्ज है। यह दस्तावेज इस बात का ठोस प्रमाण है कि दान में मिली चांदी ट्रस्ट के नियंत्रण में थी और उसका उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया। सोशल मीडिया पर जो चोरी की खबरें फैलाई गई थीं, वे पूरी तरह से आधारहीन और भ्रामक साबित हुई हैं। ट्रस्ट ने इन अफवाहों पर पूर्ण विराम लगाते हुए पारदर्शिता का परिचय दिया है।
लापरवाही और SOP का उल्लंघन, SIT की रिपोर्ट में खुलासा
हालांकि SIT ने चोरी के आरोपों को तो गलत बताया है, लेकिन मंदिर प्रबंधन में लापरवाही के गंभीर पहलुओं को उजागर किया है। रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि टिन्नू नामक व्यक्ति के पास बिना किसी विधिवत आदेश के मंदिर की हुंडियों (दानपात्रों) की चाभियां मौजूद थीं, जो एक गंभीर सुरक्षा चूक है। इसके अलावा, सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और ट्रस्ट के अधिकारियों के बीच एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय की गई थी, जिसके दस्तावेजों पर अनिल मिश्र और गोविंद मिश्र के हस्ताक्षर भी थे। जांच में यह सामने आया कि इस SOP का पालन गणना प्रक्रिया के दौरान नहीं किया गया, जिसे जानबूझकर बरती गई लापरवाही माना गया है।
भविष्य के लिए प्रबंधन की बड़ी सीख
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर यह SIT जांच एक बड़ा सबक साबित हुई है। भले ही कीमती वस्तुओं के गायब होने के दावे झूठे पाए गए, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रबंधन में ढिलाई की बात स्वीकार की गई है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में दानपात्रों की चाभियों और गणना प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। मंदिर ट्रस्ट ने भी इन खामियों को दुरुस्त करने का भरोसा दिलाया है ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र में पारदर्शिता बनी रहे और भविष्य में किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति उत्पन्न न हो।
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