US Iran Tensions : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के इस नाजुक दौर में पाकिस्तान सक्रिय कूटनीति में जुट गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ महत्वपूर्ण टेलीफोनिक वार्ता की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बातचीत उस समय हुई जब दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष अचानक से तेज हो गया है। इशाक डार ने इस वार्ता के दौरान इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान इस संवेदनशील क्षेत्र में और वैश्विक स्तर पर स्थायी शांति व स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शांति प्रयासों की सराहना और मछुआरों की सुरक्षित वापसी
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने इस दौरान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान द्वारा निभाई जा रही सकारात्मक भूमिका की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। बातचीत के दौरान इशाक डार ने न केवल क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त की, बल्कि ईरान के साथ सहयोग जारी रखने का भरोसा भी दिलाया। इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्री ने हाल ही में गिरफ्तार किए गए ईरानी मछुआरों की सुरक्षित और सुचारू रूप से वापसी सुनिश्चित करने में इस्लामाबाद द्वारा दी गई मदद के लिए इशाक डार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने और आपसी संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता सैन्य संघर्ष और वैश्विक चिंता
यह कूटनीतिक बातचीत ऐसे समय में हुई है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच पिछले सप्ताह हुए एक अंतरिम समझौते के माध्यम से युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि, गुरुवार को सिंगापुर के झंडे वाले तेल टैंकर ‘एयर लवली’ पर हुए हमले ने पूरी स्थिति को बिगाड़ दिया है। इस हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित निकालने के अपने जारी ऑपरेशन को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। एजेंसी का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें समुद्री मार्गों की पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक वे इस ऑपरेशन को पुन: शुरू नहीं करेंगे।
जवाबी हमलों ने तोड़े युद्धविराम के सभी दांव-पेच
तेल टैंकर पर हमले के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए। अमेरिकी कमांड का तर्क है कि ये हमले कमर्शियल जहाजों पर किए गए ईरानी ड्रोन हमलों के विरुद्ध एक रक्षात्मक कदम थे। इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन ताज़ा हमलों ने उस नाजुक युद्धविराम पर गहरा संदेह पैदा कर दिया है, जिसके लिए लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत चल रही थी।
भविष्य की अनिश्चितता और कूटनीतिक दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस सैन्य टकराव ने न केवल खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर संकट खड़ा कर दिया है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी खतरे में डाल दिया है। पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश अब इस स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, जिस तरह से दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, उससे शांति की संभावनाएं धूमिल होती दिख रही हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक माध्यमों से इस बढ़ते तनाव को और अधिक फैलने से रोका जा सकेगा।
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