Iran US Conflict : खाड़ी देशों में एक बार फिर युद्ध का साया मंडराने लगा है। बीते 72 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी टकराव की तीन घटनाएं सामने आई हैं, जिसने पूरे क्षेत्र को अलर्ट पर ला खड़ा किया है। 25 जून को ईरान द्वारा सिंगापुर के एक वाणिज्यिक जहाज पर ड्रोन हमले के बाद, अमेरिका ने 26 जून की रात ईरान के तटीय इलाकों और द्वीपों को निशाना बनाया। इसके जवाब में 27 जून की सुबह ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर फिर से ड्रोन हमले किए। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में 8 अप्रैल से पहले जैसी विस्फोटक स्थिति पैदा कर दी है, जहाँ हवाओं में बारूद की गंध एक बार फिर तनाव को नए स्तर पर ले गई है।

सामरिक महत्व का केंद्र: केश्म द्वीप और सिरिक तट पर प्रहार
अमेरिका और ईरान के बीच इस संघर्ष का मुख्य केंद्र ‘होर्मुज’ बना हुआ है। अमेरिका ने अपने हमलों में विशेष रूप से सिरिक तट और केश्म द्वीप को निशाना बनाया है। सिरिक तट रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित है, जहाँ ईरान ने एक विशाल रडार और संचार नेटवर्क स्थापित कर रखा है। इसी नेटवर्क की मदद से ईरान ओमान और फारस की खाड़ी पर अपनी पैनी नजर बनाए रखता है। वहीं, केश्म द्वीप ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसकी सुरक्षा के लिए सिरिक का संचार कवच अनिवार्य है। अमेरिका द्वारा इन ठिकानों को ध्वस्त करना सीधे तौर पर होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को चुनौती देना है।

‘नाक की लड़ाई’: ट्रंप और मुज्तबा के बीच वर्चस्व का संघर्ष
होर्मुज के नियंत्रण को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के बीच ठनी हुई है। ट्रंप के लिए होर्मुज की सुरक्षा एक प्रतिष्ठा का प्रश्न है, तो दूसरी ओर ईरान इसे अपनी आर्थिक कमाई का एक बड़ा अवसर मानता है। दोनों ही पक्ष होर्मुज पर अपने अधिकार का दावा कर रहे हैं। हालिया हमले में अमेरिका ने अपनी सामरिक चाल बदलते हुए किसी खाड़ी देश की जमीन का इस्तेमाल करने के बजाय ओमान की खाड़ी में तैनात अपने एयरक्राफ्ट कैरियर से फाइटर जेट्स को रवाना किया। करीब 90 मिनट तक चले इस ऑपरेशन में अमेरिकी जेट्स ने ईरानी एयरस्पेस में रहकर अपने निर्धारित लक्ष्यों को हिट किया, ताकि किसी तीसरे देश की संप्रभुता का उल्लंघन न हो और युद्ध का विस्तार न हो।
ईरान की जवाबी धमकी और अरब जगत की सुरक्षा पर संकट
अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने अपने ड्रोन का उपयोग कर अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों को निशाना बनाने की कोशिश की, जिन्हें अमेरिका ने आसमान में ही विफल कर दिया। इसके बावजूद, ईरान ने कड़ी चेतावनी जारी की है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि यदि इजरायल या अमेरिका ने दोबारा ऐसी कोई ‘बेवकूफी’ की, तो वे पूरे अरब क्षेत्र में मौजूद बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देंगे। ईरान ने सीधे तौर पर धमकी दी है कि किसी भी नए हमले की भारी कीमत पूरे अरब जगत को चुकानी पड़ सकती है।
पूर्ण युद्ध की आहट: क्या समाधान का दौर समाप्त हो चुका है?
होर्मुज के बढ़ते तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि वार्ता का दौर अब समाप्त होता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव किसी भी समय पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है। अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि दोनों देशों के बीच टकराव निकट भविष्य में कम होने के कोई संकेत नहीं हैं। खाड़ी देशों में पसरा सन्नाटा और बारूद की गंध इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र एक बार फिर अनिश्चितता और विनाश के कगार पर खड़ा है।
Read More : TET Paper Leak : महाराष्ट्र TET पेपर लीक पर राहुल गांधी का हमला, शिक्षा व्यवस्था को बताया ‘वसूली का सिस्टम’










