Mayor Audio Viral Case: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कलाकेंद्र मैदान के आवंटन को लेकर सामने आए एक वायरल ऑडियो ने स्थानीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। रविवार दोपहर को कांग्रेसी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात करने पहुंचा। अनुराग मिश्रा नामक व्यक्ति द्वारा जारी इस ऑडियो में अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत और बीजेपी सरगुजा के जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और वसूली के आरोप लगाए गए हैं। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर अनुराग मिश्रा, महापौर से उस पैसे की वापसी की मांग कर रहा है जो उसने मैदान आवंटन न होने पर दिया था। साथ ही, ऑडियो में भाजपा जिलाध्यक्ष को तीन लाख रुपये की अतिरिक्त राशि देने में असमर्थता व्यक्त करते हुए महापौर को उन्हें अपने घर से पैसे ले जाने की बात कहते हुए सुना जा सकता है। इस सनसनीखेज ऑडियो के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

महापौर का बचाव और कानूनी दांव-पेच
इस विवादित ऑडियो के वायरल होने के बाद जहां शहर में महापौर और जिलाध्यक्ष की भारी किरकिरी हो रही है, वहीं बचाव में महापौर मंजूषा भगत ने सख्त रुख अपनाया है। ऑडियो के सार्वजनिक होने के अगले ही दिन, उन्होंने आजाक थाने में अनुराग मिश्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उनका स्पष्ट कहना है कि वायरल हो रहे ऑडियो में उनकी आवाज नहीं है और यह उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए रचा गया एक सुनियोजित षड्यंत्र है। इस दौरान मीडिया के सामने भावुक होते हुए उन्होंने न्याय की गुहार लगाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कांग्रेस का आक्रामक रुख और एसआईटी की मांग
महापौर के आरोपों के बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा के खिलाफ पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस इस मामले की गंभीरता को समझने में देरी कर रहे हैं। कांग्रेस ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने की मांग की है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने पुलिस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है ताकि मामले का सच जनता के सामने आ सके।
पुलिसिया कार्रवाई और जांच पर सस्पेंस
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद जब शनिवार को आजाक थाने पहुंचे और महापौर द्वारा दिए गए आवेदन की जांच स्थिति के बारे में पूछा, तो डीएसपी ने स्पष्ट किया कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। पुलिस ने इसे उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट करने और संबंधित थाने में ट्रांसफर करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, जांच की इस धीमी गति से कांग्रेस और शहर के नागरिक संतुष्ट नहीं हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अल्टीमेटम
रविवार दोपहर को कांग्रेसी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात करने पहुंचा। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच में हो रही देरी को खत्म किया जाए और इसे संबंधित थाने में भेजकर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। कांग्रेसियों का कहना है कि पूरा शहर यह जानना चाहता है कि क्या वसूली का आरोप सही है या गलत। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले का खुलासा नहीं हुआ, तो पार्टी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी।
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