Tendu Patta News: बिलासपुर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तेंदूपत्ता फॉरेस्ट लॉट की सरकारी नीलामी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कारोबारियों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने तेंदूपत्ता खरीदने वाले कारोबारियों से खरीद मूल्य की 2 प्रतिशत Access and Benefit Sharing (ABS) राशि वसूलने के राज्य जैव विविधता बोर्ड के आदेश को वैध ठहराया है। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की अदालत ने 13 अगस्त 2026 को फैसला सुनाते हुए इस मामले से संबंधित सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।

राज्य जैव विविधता बोर्ड के आदेश को चुनौती
मामले की शुरुआत राज्य जैव विविधता बोर्ड के 24 जनवरी 2023 के आदेश और 25 जनवरी 2023 को जारी पत्र से हुई थी। इन निर्देशों के तहत तेंदूपत्ता फॉरेस्ट लॉट की सरकारी नीलामी में सफल बोली लगाने वाले खरीदारों से कुल खरीद मूल्य का 2 प्रतिशत ABS के रूप में लेने की व्यवस्था की गई थी। कारोबारियों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कारोबारियों ने क्या दी दलील?
याचिकाकर्ता कारोबारियों का कहना था कि उन्होंने तेंदूपत्ता सीधे वनवासियों या प्राथमिक संग्राहकों से नहीं खरीदा है। उनका कहना था कि उन्होंने राज्य सरकार की वैधानिक प्रक्रिया के तहत आयोजित सार्वजनिक नीलामी में फॉरेस्ट लॉट खरीदे हैं। इसलिए प्राथमिक संग्राहकों के साथ उनका कोई सीधा कारोबारी लेन-देन नहीं हुआ और उनसे ABS राशि वसूलना उचित नहीं है।
1964 के कानून का भी दिया हवाला
कारोबारियों ने अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ तेंदूपत्ता (व्यापार विनियमन) अधिनियम, 1964 का उल्लेख किया। उनका तर्क था कि राज्य में तेंदूपत्ता के संग्रहण, खरीद, परिवहन और व्यापार के लिए पहले से ही कानूनी व्यवस्था मौजूद है। सरकार और उसकी अधिकृत एजेंसियां प्राथमिक संग्राहकों से तेंदूपत्ता खरीदती हैं और बाद में इन्हीं फॉरेस्ट लॉट की नीलामी कारोबारियों के लिए करती हैं।
दोनों कानूनों की अलग-अलग भूमिका बताई
हाईकोर्ट ने कारोबारियों की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि 1964 का कानून तेंदूपत्ता के व्यापार और उससे जुड़ी गतिविधियों को नियंत्रित करता है, जबकि Biological Diversity Act, 2002 का उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, जैव संसाधनों का सतत उपयोग और उनसे होने वाले व्यावसायिक लाभ का न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित करना है। अदालत के अनुसार दोनों कानूनों के उद्देश्य अलग हैं और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

सरकारी नीलामी से ABS की जिम्मेदारी खत्म नहीं
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सरकारी नीलामी के माध्यम से तेंदूपत्ता खरीद लेने मात्र से कारोबारी ABS की कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते। कोर्ट ने माना कि तेंदूपत्ता एक जैव संसाधन है और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल Biological Diversity Act के दायरे में आता है। इसलिए राज्य जैव विविधता बोर्ड को कानून के तहत निर्धारित ABS राशि की वसूली करने का अधिकार है।
वन अधिकार कानून का भी हुआ उल्लेख
फैसले के दौरान अदालत ने Forest Rights Act, 2006 के प्रावधानों पर भी विचार किया। कोर्ट ने कहा कि तेंदूपत्ता फॉरेस्ट प्रोड्यूस की श्रेणी में आता है और संबंधित कानून वनवासी एवं आदिवासी समुदायों को इसके संग्रहण, उपयोग तथा निपटान से जुड़े अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में जैव संसाधन के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े कानूनी प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पूर्वव्यापी कार्रवाई की दलील भी खारिज
कारोबारियों ने यह भी तर्क दिया था कि 2 प्रतिशत ABS राशि की वसूली को पिछली अवधि पर लागू करना पूर्वव्यापी कार्रवाई के समान है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया। अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने कोई नया शुल्क या नया दायित्व नहीं बनाया है, बल्कि पहले से मौजूद वैधानिक प्रावधानों को लागू किया है।
कारोबारियों पर पड़ेगा सीधा असर
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद तेंदूपत्ता फॉरेस्ट लॉट की सरकारी नीलामी में सफल खरीदारों से 2 प्रतिशत ABS राशि की वसूली का रास्ता साफ हो गया है। राज्य जैव विविधता बोर्ड के आदेश को वैध ठहराए जाने से उन कारोबारियों को राहत नहीं मिली, जिन्होंने इस वसूली को चुनौती दी थी। फैसला तेंदूपत्ता व्यापार, जैव संसाधनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और लाभ के न्यायसंगत बंटवारे से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Read More : Independence Day 2026 : CM साय कर सकते हैं बड़े ऐलान, प्रदेश को मिल सकती हैं नई सौगातें











