Emergency 1975 : CM साय बोले: आपातकाल को नहीं भुलाया जा सकता, पाठ्यक्रम में शामिल करना सराहनीय कदम

Emergency 1975 : राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित ‘आपातकाल स्मृति दिवस’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया। इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री ने आपातकाल के संघर्ष पर आधारित स्मारिका ‘आपातकाल के योद्धा’ का विमोचन किया। सीएम साय ने उन वीरों को नमन किया जिन्होंने 1975 के कठिन दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल की यातनाएं सही और अभूतपूर्व त्याग किया। उन्होंने कहा कि यह कालखंड भारतीय इतिहास का ऐसा अध्याय है जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। मुख्यमंत्री ने स्मरण किया कि उस संघर्षपूर्ण समय में किस प्रकार स्वयंसेवक छिपकर सेनानियों के परिवारों तक अनाज पहुँचाते थे ताकि कोई भूखा न रहे।

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लोकतंत्र एक जीवन मूल्य है: इंद्रेश कुमार

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने लोकतंत्र को शासन प्रणाली से ऊपर उठकर एक ‘जीवन मूल्य’ बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी हर नागरिक की है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर ही हम एक सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं को नशामुक्त और स्वच्छ समाज के लिए प्रेरित किया, जो देश की प्रगति के लिए आवश्यक है।

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लोकतंत्र की रक्षा और आने वाली पीढ़ी की जिम्मेदारी

सीएम साय ने स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को यह समझाना है कि वर्तमान स्वतंत्रता और लोकतंत्र कितनी बड़ी कुर्बानियों के बाद प्राप्त हुए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की धरती को संघर्ष, संस्कृति और परंपरा की भूमि बताते हुए कहा कि यहाँ लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति लोगों की गहरी आस्था रही है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी आपातकाल के दौरान प्रेस सेंसरशिप और मौलिक अधिकारों के निलंबन की चर्चा करते हुए कहा कि यह दौर हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।

निबंध प्रतियोगिता में युवाओं की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान रहा। इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर के 540 से अधिक विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। ‘आपातकाल कभी विस्मृत न हो’ विषय पर आयोजित विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, महाविद्यालय स्तर पर ‘25 जून: संविधान हत्या दिवस’ विषय पर कल्याणी पटले प्रथम रही। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को सम्मानित करते हुए कहा कि युवाओं की संविधान और लोकतंत्र के प्रति यह जागरूकता और सक्रिय भागीदारी सराहनीय है।

विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी और प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर तिवारी सहित अनेक जनप्रतिनधि एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक बना। विभिन्न जिलों से आए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों ने इस सम्मान को अविस्मरणीय बताया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण और लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी ने संविधान के मूल्यों को सर्वोच्च रखने का प्रण लिया।

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