Assam Flood 2026 : असम इस समय प्रकृति के भीषण प्रकोप का सामना कर रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने राज्य में बाढ़ की पहली लहर को इतना आक्रामक बना दिया है कि जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ की चपेट में आने से राज्य के छह जिले—धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इनमें धेमाजी जिला सबसे अधिक संकट में है, जहाँ 15,400 से अधिक लोग अकेले बाढ़ से जूझ रहे हैं। कुल मिलाकर राज्य में 22,000 से अधिक लोग बेघर होने और आपदा की मार झेलने को मजबूर हैं। न केवल इंसानी बस्तियां, बल्कि लगभग 48,000 पशु भी इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिससे स्थिति और अधिक भयावह हो गई है।

रेलवे पुल ढहने से यातायात ठप: नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे की सेवाएं बाधित
बाढ़ की विनाशकारी शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धेमाजी जिले में सिमेन नदी पर बना महत्वपूर्ण रेलवे पुल आंशिक रूप से ढह गया है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश और नदी के तेज कटाव के कारण आर्चीपाथर और सिमेन चपारी स्टेशनों के बीच का यह पुल अस्थिर हो गया। 1965 में निर्मित और बाद में ब्रॉड गेज में परिवर्तित यह पुल सुरक्षित था, लेकिन प्राकृतिक आपदा के आगे टिक न सका। फिलहाल, तिनसुकिया डिवीजन के तहत मुर्कोंगसेलेक और शिलापाथर के बीच रेल सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई हैं। रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए शिलापाथर से बसें चलाने और स्टेशनों पर हेल्प डेस्क स्थापित करने की व्यवस्था कर रहा है।

जोनाई में केमी नदी का कहर: 300 मीटर लंबा पुल जलमग्न
सड़क मार्ग भी बाढ़ की चपेट में है। जोनाई इलाके में केमी नदी पर बना 300 मीटर लंबा लोहे का पुल पानी के तेज बहाव में बह गया है। यह पुल केमी-पुराना जेलोम और जोनाई सदर के बीच एकमात्र संपर्क माध्यम था, जिसके टूटने से आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण के समय ही कंक्रीट के मजबूत पुल की मांग की गई थी, क्योंकि केमी नदी का बहाव अत्यंत शक्तिशाली है। प्रशासन की अनदेखी के चलते आज ग्रामीणों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश से आए पानी के भारी दबाव ने इस पुल की संरचना को उखाड़ फेंका, जिससे अब ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क भी कट गया है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट
बाढ़ का पानी अब तक 96 गांवों के भीतर घुस चुका है, जिससे न केवल घरों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि 1,690 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि भी जलमग्न हो गई है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर रहा है, जिससे दिसांग नदी जैसे जलस्रोतों ने शिवसागर में चिंताएं बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने से किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हजारों की संख्या में मवेशी प्रभावित हैं और चारे की समस्या भी विकराल रूप ले रही है। खेती-बाड़ी और शिक्षा के लिए आवागमन के रास्ते बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन थम सा गया है।
बचाव और राहत कार्य: प्रशासन की स्थिति पर पैनी नजर
इस कठिन समय में असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जिला प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों में जुटा है। लगातार बारिश के कारण स्थिति पर नियंत्रण पाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सरकार प्रभावित इलाकों में भोजन, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय स्थलों का इंतजाम करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, नदियों का बढ़ता स्तर और कटाव लगातार नए क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे बचाव दल को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। आने वाले दिनों में भारी बारिश का अनुमान है, जिसे देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने और निचले इलाकों को खाली करने की चेतावनी दी है। यह बाढ़ न केवल एक आपदा है, बल्कि राज्य के बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती भी साबित हो रही है।
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