Ram Mandir Scame : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हुई कथित चोरी और गबन के मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। इसी क्रम में आज, सोमवार को इस मामले से जुड़े सभी आठ आरोपियों को एंटी-करप्शन कोर्ट में वर्चुअल मोड के माध्यम से पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत (ज्युडिशल कस्टडी) को आगामी 14 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है। ज्ञात हो कि इससे पहले उनकी हिरासत की अवधि 29 जून को समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उन्हें फिर से कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।

पुलिस रिमांड की मांग नहीं, आरोपी रहेंगे जेल में
न्यायिक प्रक्रिया के इस चरण में पुलिस ने अदालत से किसी भी आरोपी की कस्टडी रिमांड की मांग नहीं की। पुलिस द्वारा रिमांड न मांगे जाने का सीधा अर्थ यह है कि फिलहाल आरोपियों से पुलिस हिरासत में कोई पूछताछ नहीं होगी और वे अगले 14 दिनों तक न्यायिक अभिरक्षा में ही रहेंगे। कानूनी जानकारों के अनुसार, अब वे सभी आरोपी जो इस समय जेल में बंद हैं, वे आगे की सुनवाई तक अपनी न्यायिक हिरासत की अवधि जेल में ही काटेंगे। इस दौरान जांच एजेंसियां अपने स्तर पर सबूत जुटाने का कार्य जारी रखेंगी।

कौन-कौन हैं इस मामले में गिरफ्तार आरोपी?
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में अब तक कुल आठ लोगों को नामजद कर गिरफ्तार किया गया है। इन आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। पुलिस प्रशासन इस मामले की तह तक जाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। इसी कड़ी में, रविवार को पुलिस की विभिन्न टीमों ने इन सभी आठों आरोपियों के घरों पर एक साथ औचक छापेमारी की और तलाशी अभियान चलाया ताकि गबन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग और साक्ष्य हासिल किए जा सकें।
अयोध्या के वकीलों का कड़ा रुख: पैरवी करने पर जुर्माना
इस मामले ने अयोध्या के स्थानीय बार एसोसिएशन को भी आंदोलित कर दिया है। मंदिर के दान में गबन को लेकर स्थानीय अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। इसी विरोध के चलते, अयोध्या के वकीलों ने एक सर्वसम्मत फैसला लिया है कि वे अदालत में इन आरोपियों की ओर से कोई पैरवी नहीं करेंगे। बार एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया गया कि यदि कोई वकील इन आरोपियों का केस लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। यह फैसला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जांच एजेंसियों की साक्ष्य जुटाने की निरंतर प्रक्रिया
राम मंदिर दान गबन का यह मामला न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में संवेदनाओं और चर्चाओं का केंद्र बन गया है। फिलहाल, जांच एजेंसियां इस पूरे घोटाले की परतें खोलने में जुटी हुई हैं और वैज्ञानिक तथा दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र कर रही हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की कानूनी कार्रवाई पूरी तरह से जांच की प्रगति और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही तय की जाएगी। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि मंदिर की पवित्रता और दान की राशि की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए।
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