US Supreme Court : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राष्ट्रपति ट्रंप की शक्तियों में हुई बड़ी बढ़ोतरी

US Supreme Court : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कानूनी जीत हासिल हुई है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अब फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) जैसे स्वतंत्र सरकारी आयोगों के सदस्यों को केवल नीतिगत मतभेदों के आधार पर भी उनके पद से हटा सकते हैं। इस निर्णय ने अमेरिकी राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों को काफी विस्तार दिया है। 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले में कोर्ट के सभी छह कंजर्वेटिव जजों ने ट्रंप के पक्ष में अपना मत दिया, जबकि तीन लिबरल जजों ने इस पर असहमति जताई। यह कानूनी लड़ाई FTC की पूर्व कमिश्नर रेबेका स्लॉटर से जुड़ी थी, जिन्हें राष्ट्रपति ने नीतिगत मतभेदों के चलते पदमुक्त कर दिया था।

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91 साल पुराने ऐतिहासिक फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

इस निर्णय के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 1935 के प्रसिद्ध ‘हम्फ्रीज एग्जीक्यूटर बनाम यूनाइटेड स्टेट्स’ मामले में दिए गए उस फैसले को भी पलट दिया है, जिसने पिछले 91 वर्षों से स्वतंत्र सरकारी एजेंसियों के प्रमुखों को राजनीतिक हस्तक्षेप और मनमाने तरीके से हटाए जाने के खिलाफ सुरक्षा प्रदान की थी। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने अपने तर्क में कहा कि FTC अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने वाले दर्जनों कानूनों को लागू करती है, जो कार्यपालिका (Executive) के दायरे में आते हैं। इसलिए, राष्ट्रपति का इन अधिकारियों पर नियंत्रण होना संवैधानिक रूप से आवश्यक है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले को अपने प्रशासन की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद-2 के तहत राष्ट्रपति को मिली शक्तियों को पुन: स्थापित करता है।

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शक्तियों के संतुलन पर सवाल: लिबरल जजों की चिंता

कोर्ट के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए जस्टिस सोनिया सोटोमेयर ने कहा कि यह निर्णय सरकार के भीतर मौजूद शक्तियों के संतुलन को बिगाड़ देगा। लिबरल जजों का तर्क है कि अब स्वतंत्र सरकारी आयोग सीधे राष्ट्रपति के राजनीतिक नियंत्रण में काम करेंगे, जिससे राष्ट्रपति के हाथों में अत्यधिक केंद्रित सत्ता आ जाएगी। रेबेका स्लॉटर ने भी इस फैसले पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका मानना है कि 91 साल पुरानी व्यवस्था को पलटने से न केवल कांग्रेस की भूमिका कमजोर होगी, बल्कि देश के महत्वपूर्ण आर्थिक फैसलों पर राष्ट्रपति का राजनीतिक प्रभाव इतना बढ़ जाएगा कि आयोगों की स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो सकती है।

फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता बरकरार: कोर्ट ने लगाई लक्ष्मण रेखा

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यापक अधिकार को पूरी तरह से निरंकुश नहीं होने दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को मिलने वाली यह हटाने की शक्ति अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी ‘फेडरल रिजर्व’ पर लागू नहीं होगी। उसी दिन एक अन्य मामले में, कोर्ट ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लीसा कुक को हटाने की राष्ट्रपति ट्रंप की कोशिश को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि फेडरल रिजर्व की संस्थागत स्वतंत्रता पहले की तरह बनी रहेगी और राष्ट्रपति उसे राजनीतिक कारणों से नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि देश की मौद्रिक नीति और आर्थिक स्थिरता के मामलों में अभी भी राष्ट्रपति की पहुंच सीमित रहेगी।

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Chandan Das

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