Bulldozer Action : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के उस समय कोहराम मच गया, जब प्रशासन ने अचानक बिजली आपूर्ति बाधित कर बुलडोजर चला दिए। सुबह 4 बजे शुरू हुई इस विध्वंसक कार्रवाई में लगभग 80 पक्के मकानों को जमींदोज कर दिया गया। देखते ही देखते दशकों से बसी बस्तियां मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं। इस अचानक हुई कार्रवाई के कारण प्रभावित परिवारों, जिनमें नवजात बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थीं, को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पूरा दिन बीतने के बाद भी प्रशासन ने विस्थापितों के लिए किसी उचित अस्थायी आश्रय की व्यवस्था नहीं की, जिससे हजारों लोगों को खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर होना पड़ा।

सांसद के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई, ग्रामीणों में गहरा आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस बर्बर कार्रवाई से मात्र 48 घंटे पहले ही उन्होंने रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की थी। ग्रामीणों के अनुसार, सांसद ने उन्हें स्पष्ट आश्वासन दिया था कि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है, इसलिए तब तक किसी भी घर पर बुलडोजर नहीं चलेगा और प्रशासन के साथ मिलकर कोई सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जाएगा। सांसद के इस वादे पर भरोसा करने वाले ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद का आश्वासन पूरी तरह से झूठा साबित हुआ और उन्हें प्रशासन के आगे बेबस छोड़ दिया गया।

पुनर्वास के नाम पर अव्यवस्था का दंश
प्रभावितों का दर्द तब और गहरा गया जब वे रात के अंधेरे में कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय से मिले। विस्थापितों ने बताया कि प्रशासन उन्हें पुनर्वास के नाम पर नया रायपुर के सेक्टर-30 में केवल एक कमरा दे रहा है। इतने बड़े परिवारों के लिए, जिनमें सदस्यों की संख्या 12 से 14 तक है, एक कमरे का आवंटन किसी मजाक से कम नहीं है। साथ ही, आवंटित घरों में न तो बिजली की सुविधा है, न पानी का इंतजाम और न ही शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतें उपलब्ध हैं। इस स्थिति में ग्रामीण अपने मलबे के पास बैठने को मजबूर हैं, जहाँ बुजुर्ग लोग मासूम बच्चों को गोद में लिए बेबसी की तस्वीरें पेश कर रहे हैं।
राजनीतिक घमासान: टीएस सिंहदेव ने सरकार पर साधा निशाना
इस अमानवीय कार्रवाई के खिलाफ राजनीतिक गलियारों में भी विरोध तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा, “बरसात के मौसम के ठीक पहले की गई यह असंवेदनशील कार्रवाई निंदनीय है। इस सरकार ने राज्य के नागरिकों के हितों पर लगातार कुठाराघात किया है और अब इसने शासन संभालने का नैतिक अधिकार भी खो दिया है।” टीएस सिंहदेव की इस टिप्पणी ने सत्तापक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन का तर्क और भविष्य की चुनौती
हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन का कहना है कि वे नया रायपुर के ईडब्ल्यूएस (EWS) मकानों में आवंटन प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं और जल्द ही सभी परिवारों को बसा दिया जाएगा। हालांकि, जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मलबे के बीच बैठे परिवारों के लिए बरसात का मौसम एक बड़ी चुनौती बन गया है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और जनता के प्रति उसकी संवेदनहीनता ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। फिलहाल, प्रभावित ग्रामीण धरने पर बैठे हैं और सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग कर रहे हैं।
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