Chhattisgarh Monsoon : छत्तीसगढ़ में मानसून का रौद्र रूप, भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट, जानें अगले 7 दिनों का हाल

Chhattisgarh Monsoon : छत्तीसगढ़ में मानसून का प्रभाव पूरी तरह से बना हुआ है, जिसके कारण राज्य भर में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, गुरुवार, 2 जुलाई को प्रदेश के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। मानसून की सक्रियता के कारण राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी किया है और आम जनता से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया है।

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अगले 24 घंटे इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए नारायणपुर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जैसे हालात बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त, महासमुंद, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद, बस्तर और सुकमा जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने इन जिलों में रहने वाले लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और निचले इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है। किसी भी आपात स्थिति के लिए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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प्रदेश के अन्य जिलों में भी मानसून की सक्रियता

भारी बारिश की चेतावनी केवल दक्षिण छत्तीसगढ़ तक ही सीमित नहीं है। राज्य के अन्य जिलों जैसे जशपुर, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मुंगेली, कोरबा और जांजगीर-चांपा में भी मानसून का व्यापक असर देखने को मिलेगा। यहां भी मध्यम से भारी बारिश की गतिविधियों के कारण जनजीवन प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि पूरा बस्तर संभाग इस समय मानसून के सिस्टम के केंद्र में है, जिसके कारण वहां बारिश की गतिविधियां अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक तीव्रता के साथ जारी रहने का अनुमान है।

वज्रपात की चेतावनी और सुरक्षा के उपाय

भारी बारिश के साथ-साथ मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली गिरने (वज्रपात) की आशंका को लेकर भी चेतावनी जारी की है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और आम लोगों को सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले खेतों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे आश्रय न लें। वज्रपात के दौरान पक्के मकानों के भीतर रहना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। प्रशासन ने पशुपालकों से भी अपील की है कि वे अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और बिजली कड़कने के दौरान बाहर निकलने से बचें।

बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बढ़ा बारिश का दौर

छत्तीसगढ़ में बारिश की इस सक्रियता के पीछे मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण और एक सक्रिय मानसूनी द्रोणिका (Monsoon Trough) है। इस मौसमी सिस्टम के चलते अगले कुछ दिनों तक छत्तीसगढ़ में नमी का प्रवाह बना रहेगा, जिससे बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 7 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला बना रहेगा। अगले पांच दिनों के दौरान तापमान में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं है, जिससे प्रदेश में उमस भरी गर्मी से राहत बनी रहेगी।

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Chandan Das

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