Sabir Alam Escape : झारखंड के धनबाद (वासेपुर) में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी साबीर आलम पिछले 15 वर्षों से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। 18 अक्टूबर 2001 को हुई इस खौफनाक घटना में नाजमा खातून और उनकी बहन शहनाज खातून की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में साबीर आलम मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी था। साबीर को निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा। फरवरी 2026 में जब सजा पक्की हुई, तो आरोपी फरार हो गया। वर्षों तक पुलिस को छकाते हुए वह अंबिकापुर में एक सामान्य नागरिक की तरह रह रहा था, जिसकी भनक स्थानीय पुलिस को भी नहीं लगी।

झारखंड पुलिस की चूक और अपराधी का फरार होना
साबीर आलम के फरार होने और उसके अंबिकापुर में होने की पक्की खबर मिलने के बाद झारखंड पुलिस की एक टीम उसे गिरफ्तार करने पहुंची थी। आरोप है कि धनबाद पुलिस ने स्थानीय सरगुजा पुलिस को इस ऑपरेशन की कोई पूर्व सूचना नहीं दी। जब झारखंड पुलिस साबीर के ठिकाने पर पहुंची, तो आरोपी ने उन्हें चकमा देकर आसानी से वहां से फरार होने में कामयाबी हासिल कर ली। इस घटना ने झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपराधी के हाथ से निकल जाने के बाद धनबाद पुलिस ने आनन-फानन में सरगुजा पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और शहर में सनसनी फैल गई।

15 साल से अंबिकापुर में छिपकर रह रहा था अपराधी
सूचना मिलने के बाद सरगुजा पुलिस ने जब साबीर आलम का रिकॉर्ड खंगाला, तो पता चला कि वह पिछले डेढ़ दशक से अंबिकापुर में रह रहा था। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस अवधि के दौरान उसने सरगुजा में कोई भी नया आपराधिक कृत्य नहीं किया, जिससे स्थानीय पुलिस को कभी उस पर संदेह नहीं हुआ। वह पूरी तरह से खुद को समाज में घुला-मिला चुका था। लेकिन, जब शहरवासियों को यह पता चला कि उनके बीच एक खूंखार दोहरे हत्याकांड का ‘मोस्ट वांटेड’ अपराधी रह रहा था, तो हर कोई दंग रह गया। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और बाहरी लोगों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरगुजा पुलिस ने शुरू की गहन तलाश
अब आरोपी के फरार होने के बाद सरगुजा पुलिस सक्रिय हो गई है। पुलिस की विभिन्न टीमें साबीर आलम की तलाश में जुट गई हैं। चूँकि आरोपी को शहर की भौगोलिक स्थिति और गलियों का गहरा ज्ञान है, इसलिए उसे पकड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस ने शहर के संवेदनशील इलाकों और संभावित ठिकानों पर नाकेबंदी बढ़ा दी है। आला अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि अपराधी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह पूरा मामला न केवल वासेपुर के उस खौफनाक अतीत को वापस ले आया है, बल्कि पुलिसिया समन्वय और अंतर्राज्यीय अपराध नियंत्रण की कमजोर कड़ियों को भी उजागर कर गया है। अब पूरे अंबिकापुर की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
सरगुजा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने बताया कि धनबाद की पुलिस टीम अंबिकापुर आई थी।उन्हें किसी वारंटी को गिरफ्तार करना था। टीम के सदस्य सरगुजा पुलिस को बगैर सूचना दिए वारंटी को पकड़ने चले गए थे। जब वारंटी पकड़ में नहीं आया तो सरगुजा पुलिस को सूचना दी गई थी। सरगुजा पुलिस के साथ धनबाद पुलिस ने संयुक्त रूप से वारंटी को पकड़ने का प्रयास किया था लेकिन वह नहीं मिला।
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