Surguja Political Row: सरगुजा जिले में हाल के दिनों में सामने आई कई हाई-प्रोफाइल घटनाओं को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने जिले के रसूखदार नेताओं और सत्ता पक्ष के समर्थकों से जुड़े विभिन्न विवादित मामलों में प्रशासन की कथित ढुलमुल नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि रसूखदारों को बचाने के लिए कानून और व्यवस्था को दरकिनार किया जा रहा है। इसी के विरोध में कांग्रेस ने 6 जुलाई को राजीव भवन से आईजी कार्यालय तक एक ‘न्याय यात्रा’ निकालने का निर्णय लिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता शफी अहमद ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इन मामलों को बिंदुवार उठाते हुए सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए हैं।

महापौर और भाजपा जिलाध्यक्ष का वायरल ऑडियो मामला
प्रेस वार्ता में सबसे प्रमुख मुद्दा एक वायरल ऑडियो का रहा, जिसमें कथित तौर पर रिश्वत के लेनदेन की बात हो रही है। कांग्रेस का आरोप है कि ऑडियो में भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया और महापौर मंजूषा भगत की आवाजें स्पष्ट हैं, जिसमें कला केंद्र मैदान के आवंटन के एवज में पैसों के सौदे की चर्चा है। शफी अहमद ने बताया कि 22 जून को महापौर ने इसे ‘एआई जनरेटेड’ बताकर पल्ला झाड़ लिया, लेकिन पुलिस ने अभी तक न तो अपराध दर्ज किया और न ही कोई ठोस जांच की। कांग्रेस ने मांग की है कि संबंधित पक्षों को अपने कॉल रिकॉर्ड सार्वजनिक करने चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। प्रशासन की इस चुप्पी पर कांग्रेस ने अपनी गहरी नाराजगी जताई है।

विधायक पर नायब तहसीलदार से मारपीट का गंभीर आरोप
कांग्रेस ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो से जुड़े मारपीट प्रकरण को भी जोर-शोर से उठाया। 27 मई को विधायक और उनके समर्थकों पर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। दिलचस्प बात यह है कि इस घटना के समय सीतापुर एसडीएम स्वयं मौके पर उपस्थित थे। इस विवाद के कारण राजस्व कर्मचारियों को पूरे राज्य में हड़ताल पर जाना पड़ा था। कांग्रेस का कहना है कि मामला दर्ज होने और प्रभावी धाराएं लागू होने के बावजूद, विधायक की गिरफ्तारी न होना राज्य में सत्ता के संरक्षण का स्पष्ट प्रमाण है। यह घटना प्रशासन के मनोबल को गिराने वाली है।
भिट्ठीकला जमीन विवाद: सत्ता के प्रभाव से नहीं हो रही FIR
सरगुजा जिले के भिट्ठीकला गांव से जुड़ा जमीन हथियाने का मामला भी अब विवादों के केंद्र में है। आरोप है कि एक विधवा महिला की 3.14 एकड़ जमीन में से केवल 24 डिसमिल का सौदा किया गया, लेकिन कूटरचना के जरिए पूरी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया। कलेक्टर द्वारा तहसीलदार को खरीदारों के खिलाफ अपराध दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद, आज तक FIR नहीं हुई है। कांग्रेस का आरोप है कि इस जमीन के खरीददार एक प्रभावशाली कैबिनेट मंत्री के बेहद करीबी हैं। इन सभी मामलों पर कांग्रेस का कहना है कि यदि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे जनता के बीच लेकर जाएंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे।
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