Bangladesh Teesta River Project: चीन की बढ़ती भूमिका पर भारत अलर्ट, जरूरत पड़ने पर कदम उठाने के संकेत

Bangladesh Teesta River Project:  हाल के समय में बांग्लादेश और चीन के बीच रणनीतिक परियोजनाओं, विशेषकर ‘तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट’ और ‘चीन-बांग्लादेश-म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (CBMEC) को लेकर बढ़ा सहयोग भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पिछले महीने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान इन प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर चीन के साथ तकनीकी और वित्तीय सहयोग की सहमति बनी है। इस बढ़ते घटनाक्रम पर भारत ने बेहद सतर्क प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों में होने वाली हर महत्वपूर्ण गतिविधि पर करीबी नजर रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत इन घटनाक्रमों का विश्लेषण कर रहा है और समय आने पर अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के अनुसार उचित कदम उठाएगा।

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तीस्ता परियोजना: भारत का रुख और रणनीतिक पेच

तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत ने अपना पक्ष पहले ही स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बांग्लादेश के साथ भारत के विकास सहयोग कार्यक्रम एक पूर्व-निर्धारित रोडमैप और आपसी सहमति के आधार पर चलते हैं। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि वह तीस्ता परियोजना से जुड़े किसी भी नए घटनाक्रम को अपनी समग्र विदेश और सुरक्षा नीति का हिस्सा बनाकर ही अपनी आगे की रणनीति तय करेगा। उल्लेखनीय है कि जून 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीस्ता के संरक्षण के लिए भारत की ओर से एक तकनीकी टीम भेजने का प्रस्ताव रखा था। भारत और बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियां हैं, लेकिन तीस्ता के जल-बंटवारे का मुद्दा अब तक एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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चीन की बढ़ती भूमिका और भारत की सामरिक चिंताएं

भारत की चिंता का प्रमुख कारण बांग्लादेश की आधारभूत परियोजनाओं में चीन का सीधा दखल है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि CBMEC परियोजना मूर्त रूप लेती है, तो चीन को बंगाल की खाड़ी तक सीधी पहुंच मिल जाएगी, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इसके अतिरिक्त, सबसे बड़ी सामरिक चिंता ‘चिकन नेक’ (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) को लेकर है। यदि चीनी विशेषज्ञ तीस्ता नदी के प्रबंधन पर काम करते हैं, तो उन्हें भारत के इस बेहद संवेदनशील और संकरे भूभाग के करीब तक पहुंचने का मौका मिल सकता है, जो पूर्वोत्तर भारत को मुख्य भूमि से जोड़ता है।

बीजिंग का सक्रिय रुख और भविष्य की चुनौतियां

चीन भी इन परियोजनाओं को लेकर काफी सक्रिय है। ढाका में चीनी राजदूत याओ वेन ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि चीन, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ मिलकर CBMEC को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। चीनी जल संसाधन मंत्री ने पहले ही बांग्लादेश को तकनीकी सहयोग का भरोसा दिया है, और चीनी विशेषज्ञों द्वारा तीस्ता परियोजना की ‘फीजिबिलिटी स्टडी’ भी पूरी की जा चुकी है। यह साफ है कि नई बांग्लादेश सरकार, बीएनपी नेतृत्व के तहत, चीन के साथ अपने बुनियादी ढांचागत संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहती है। भारत के लिए यह स्थिति एक दोहरी चुनौती है—एक तरफ उसे अपने पड़ोसी देश के साथ संबंधों को संतुलित रखना है, तो दूसरी तरफ चीन के बढ़ते प्रभुत्व को नियंत्रित करने के लिए अपनी रणनीतिक घेराबंदी को और अधिक मजबूत करना होगा।

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