Bilaspur HC : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा थाना क्षेत्र में सामाजिक बहिष्कार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने सीएनआई (CNI) चर्च की नई कमेटी के पादरी समेत 7 पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पूरा प्रकरण कोटा के मिशन कंपाउंड स्थित सीएनआई चर्च से जुड़ा है। पीड़ित हरीश लाल और उनके परिवार का आरोप है कि चर्च की नई कमेटी के सदस्य उन्हें लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। प्रताड़ना का स्तर इतना बढ़ गया कि कमेटी द्वारा बाकायदा सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर लोगों को पीड़ित परिवार से सभी तरह के संबंध तोड़ने का फरमान सुना दिया गया। इस अमानवीय कृत्य के कारण पीड़ित परिवार समाज से कट गया और उसे भारी मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ रहा है।

परिवार ने लगाया सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप
पीड़ित हरीश लाल ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया कि चर्च कमेटी के पदाधिकारियों ने न केवल उनका बहिष्कार किया, बल्कि स्थानीय निवासियों और अन्य चर्च सदस्यों से भी यह अपील की कि वे उनके परिवार से किसी भी प्रकार की बातचीत न करें। इतना ही नहीं, समुदाय के लोगों को यह हिदायत भी दी गई कि वे परिवार के सुख-दुख के किसी भी कार्यक्रम में शामिल न हों। इस सामाजिक बहिष्कार ने परिवार के दैनिक जीवन को प्रभावित कर दिया है। आरोपों के अनुसार, कमेटी के सदस्य अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए परिवार को मानसिक रूप से तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। इस तरह के बहिष्कार से परिवार को न केवल अपमानित होना पड़ा, बल्कि वे सामाजिक अलगाव के गहरे संकट में भी घिर गए थे।

पुलिस की निष्क्रियता और कोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने इस प्रताड़ना और बहिष्कार के खिलाफ सबसे पहले कोटा पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने इस गंभीर मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्यवाही नहीं की। पुलिस से राहत न मिलने के बाद, परिवार ने न्याय के लिए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीप्ति बरवा की अदालत में हुई। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन माना और कोटा पुलिस को तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए। कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस ने पादरी और कमेटी के अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
समाज में चर्चा का विषय बना बहिष्कार का फरमान
इस घटना ने पूरे बिलासपुर और ईसाई समुदाय के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक धार्मिक संस्था द्वारा अपने ही सदस्य के खिलाफ इस तरह का ‘सामाजिक बहिष्कार’ का फरमान जारी करना कानून और मानवता के विरुद्ध माना जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। फिलहाल, एफआईआर दर्ज होने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है और वे चाहते हैं कि समाज में इस तरह की कुरीतियों और प्रताड़ना को बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई दूसरा परिवार इस तरह के अलगाव का शिकार न हो।
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