Bastar Kotwar Protest: कम मानदेय से नाराज कोटवारों का प्रदर्शन, शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

Bastar Kotwar Protest:  छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर सहित पूरे प्रदेश में शुक्रवार को कोटवारों ने अपनी उपेक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कोटवार संघ के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में कोटवारों ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर अपनी एकजुटता दिखाई। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार के समक्ष अपनी वर्षों से लंबित मांगों को प्रमुखता से रखना था। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जुटे कोटवारों ने जोरदार नारेबाजी की और अंत में मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। कोटवारों की प्रमुख मांगें उन्हें ‘शासकीय कर्मचारी’ का दर्जा प्रदान करना, नियमित वेतनमान लागू करना और वर्तमान महंगाई के अनुरूप मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करना है।

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प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं कोटवार, लेकिन मिल रहा है तुच्छ मानदेय

कोटवार संघ का तर्क है कि वे गांवों में सरकारी तंत्र की आंख और कान के रूप में कार्य करते हैं। गांव-गांव तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने से लेकर राजस्व विभाग के कामकाज में सहयोग करना, पुलिस को गुप्त सूचनाएं देना और पंचायत, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य व निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रबंधन हो या कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती, कोटवार हर मोर्चे पर मुस्तैद रहते हैं। हालांकि, इतनी महत्वपूर्ण और विविध जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद, उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक बेहद कम है। वर्तमान में अधिकांश कोटवारों को केवल 3 हजार से 6 हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय मिलता है, जो आज के महंगाई के दौर में एक परिवार के भरण-पोषण के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।

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संघ की सरकार को सीधी चेतावनी: जल्द पूरी हों मांगें, वरना होगा आंदोलन

कोटवार संघ के संभागीय अध्यक्ष चतुरराम बघेल ने शासन की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार कोटवारों से तो विभिन्न विभागों के सभी प्रकार के कार्य करवा रही है, लेकिन जब उनकी अपनी बात आती है, तो सरकार मूकदर्शक बनी रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोटवारों की वर्षों पुरानी मांगों पर अभी तक कोई ठोस निर्णय न लेना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। संघ ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया और वेतनमान की विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो आंदोलन का स्वरूप और अधिक व्यापक होगा।

भविष्य में प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

जगदलपुर के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ के कोटवार अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं और किसी भी कीमत पर अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। संघ के पदाधिकारियों ने घोषणा की है कि यदि सरकार जल्द ही वार्ता के लिए पहल नहीं करती है, तो आगामी दिनों में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाकर रणनीति तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कोटवार प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने के लिए भी बाध्य होंगे। फिलहाल, पूरे प्रदेश के कोटवारों की निगाहें अब मुख्यमंत्री के कार्यालय और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या पहल करते हैं। कोटवारों का कहना है कि वे केवल सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए न्यूनतम अधिकारों की मांग कर रहे हैं, जो उनका संवैधानिक अधिकार भी है।

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Chandan Das

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