Prabowo Subianto : इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने हालिया भारत यात्रा के दौरान अपने संबोधन में भारत के साथ अपने गहरे संबंधों को बड़ी आत्मीयता से साझा किया। उन्होंने याद करते हुए बताया कि वे 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। अपने निजी संबंधों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति प्राबोवो ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि भारत आने से ठीक पहले उन्होंने जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट कराया, जिसमें उनके शरीर में भारतीय DNA होने की पुष्टि हुई। इस बात पर वहां मौजूद भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यही कारण है कि जब भी वे भारतीय संगीत सुनते हैं, तो उनका शरीर स्वतः थिरकने लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मंत्री और जनरल भी भारतीय संगीत और गायन के शौकीन हैं।
लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली की भारत से सीख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक की सराहना करते हुए राष्ट्रपति प्राबोवो ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि लोकतांत्रिक प्रणाली का रास्ता चुनौतियों से भरा होता है, लेकिन न्याय और समावेशी विकास के लिए यह सबसे बेहतरीन मार्ग है। उन्होंने विशेष रूप से भारत की चुनाव प्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि इंडोनेशिया भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और केंद्र व राज्य स्तर पर सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण से बहुत कुछ सीख रहा है। उन्होंने इसे एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया और कहा कि वे निरंतर भारत के इस सफल मॉडल का अध्ययन करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के विकास मॉडल को अपनाया
एक रणनीतिक और महत्वपूर्ण पल में, राष्ट्रपति प्राबोवो ने लंच के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की विकास नीतियों की खुले दिल से तारीफ की। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वे उनके करियर और कार्यक्रमों को बहुत करीब से फॉलो करते हैं। प्राबोवो ने कहा कि इंडोनेशिया की जनसांख्यिकी, विशाल आबादी, कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियां काफी हद तक भारत जैसी ही हैं। चूँकि भारत ने इन चुनौतियों के बावजूद अद्भुत प्रगति की है, इसलिए इंडोनेशिया ने भारत के कई सफल कार्यक्रमों को अपने देश में अपनाया है।
‘कार्यक्रमों पर कोई कॉपीराइट नहीं’ का दिया संदेश
इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के जिन कार्यक्रमों को उन्होंने अपने देश में लागू किया है, वे जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए एक हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मुझे बहुत खुशी है कि आपके इन कार्यक्रमों पर कोई कॉपीराइट नहीं है।” उनका यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और आपसी विश्वास को दर्शाता है। यह पहली बार है जब किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष ने सार्वजनिक मंच से भारत के विकास मॉडल को अपनाने और उसकी सफलता को इतने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है। राष्ट्रपति प्राबोवो की यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में एक नया अध्याय लिखने वाली साबित हुई है।
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