Israel-Palestine : इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया में मानवीय अधिकारों के पैरोकारों को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस फोटो में एक गिरफ्तार फिलिस्तीनी व्यक्ति को अत्यंत अपमानजनक स्थिति में देखा जा सकता है। व्यक्ति को केवल अंडरवियर में, आंखों पर पट्टी बांधकर और हाथ-पैर बांधकर एक लोहे की छड़ पर औंधे मुंह लिटाया गया है।

यह तस्वीर किसी और ने नहीं, बल्कि एक इजरायली सैनिक ने अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर ‘गुड मॉर्निंग’ कैप्शन के साथ साझा की थी। हालांकि बाद में उस अकाउंट को डिलीट कर दिया गया, लेकिन तब तक यह फोटो इंटरनेट पर आग की तरह फैल चुकी थी। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि फिलिस्तीनियों के साथ इजरायली सेना द्वारा की जा रही यातना और उनके अपमान का एक ठोस और वीभत्स सबूत है।

युद्ध अपराध और मानवाधिकारों का उल्लंघन
‘द गार्डियन’ की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘फिजिशियंस फॉर ह्यूमन राइट्स इजरायल’ (PHRI) के ओनेग बेन ड्रोर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हिरासत में रखे गए कैदियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करना और उनकी अपमानजनक तस्वीरें सार्वजनिक करना सीधे तौर पर ‘युद्ध अपराध’ (War Crime) की श्रेणी में आता है। यह घटना उन हजारों बयानों की पुष्टि करती है, जो फिलिस्तीनी कैदियों द्वारा लंबे समय से अपने साथ हो रहे अत्याचारों को लेकर दिए जाते रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इजरायल के हिरासत केंद्र फिलिस्तीनियों के लिए ‘टॉर्चर कैंप’ (यातना शिविर) में तब्दील हो चुके हैं, जहाँ मानवीय गरिमा का कोई स्थान नहीं बचा है। इजरायली सेना ने इस फोटो की सत्यता की पुष्टि की है और इसे अपने ‘मूल्यों के विरुद्ध’ बताते हुए जांच का आश्वासन दिया है।
लापता बेटों की तलाश में दो मांओं का दर्द
इस तस्वीर का एक और दर्दनाक पहलू यह है कि इसे देखने के बाद फिलिस्तीनी परिवारों के जख्म फिर से हरे हो गए हैं। कम से कम दो मांओं ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति उनका लापता बेटा है। सारी बाशी, जो ‘पब्लिक कमिटी अगेंस्ट टॉर्चर’ की कार्यकारी निदेशक हैं, ने इसे लापता लोगों के परिवारों के लिए एक असहनीय और वीभत्स स्थिति बताया है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इजरायली सैनिकों ने बंदियों की ऐसी अपमानजनक तस्वीरें जारी की हैं, जबकि उनके परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी तक नहीं दी जा रही है।
परिवारों के लिए अपने बच्चों की स्थिति जानने का यह तरीका न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि यह उस गहरे दुख और अनिश्चितता को भी दर्शाता है जिसमें फिलिस्तीनी समाज का एक बड़ा वर्ग पिछले कई वर्षों से जीने को मजबूर है। यह मामला इजरायल की हिरासत प्रणालियों की पारदर्शिता और युद्ध के दौरान मानवाधिकारों के पालन पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।
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