Sourav Ganguly ICC Hall of Fame: भारतीय क्रिकेट के ‘दादा’ कहे जाने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के लिए 8 जुलाई का दिन ऐतिहासिक बन गया। अपने 54वें जन्मदिन के अवसर पर उन्हें एक बेहद खास तोहफा मिला, जब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘आईसीसी हॉल ऑफ फेम’ में शामिल करने की आधिकारिक घोषणा की। स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग में आयोजित आईसीसी की बोर्ड की सालाना बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस सम्मान के साथ ही, गांगुली हॉल ऑफ फेम में जगह पाने वाले कुल 12वें भारतीय क्रिकेटर और 10वें पुरुष भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इस उपलब्धि पर आभार व्यक्त करते हुए गांगुली ने इसे अपने करियर का सबसे बड़ा सम्मान बताया और आईसीसी व चेयरमैन जय शाह का धन्यवाद किया।

भारतीय क्रिकेट का स्वर्णिम इतिहास: हॉल ऑफ फेम में शामिल दिग्गजों की सूची
आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होना किसी भी क्रिकेटर के लिए शिखर को छूने जैसा है। सौरव गांगुली का नाम अब बिशन सिंह बेदी, सुनील गावस्कर, कपिल देव, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, विनू मांकड़, डायना एडुलजी, वीरेंद्र सहवाग, नीतू डेविड और एमएस धोनी जैसे महान खिलाड़ियों की कतार में शामिल हो गया है। आईसीसी ने साल 2009 में दुबई में फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेटर्स एसोसिएशन (FICA) के सहयोग से इस विशेष क्लब की शुरुआत की थी। यह पुरस्कार क्रिकेट के इतिहास में अमिट छाप छोड़ने वाले दिग्गजों की उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए दिया जाता है, जो आईसीसी के शताब्दी समारोह और वार्षिक पुरस्कारों का एक अभिन्न हिस्सा है।

🏏 भारतीय क्रिकेट के महानतम कप्तानों में से एक सौरव गांगुली को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं! 🇮🇳
'दादा', 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' और 'बंगाल टाइगर' के नाम से मशहूर सौरव गांगुली ने अपनी आक्रामक कप्तानी, बेखौफ सोच और नेतृत्व से भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई। उनकी विरासत आज भी हर युवा… pic.twitter.com/M6qo4AeCmF
— Doordarshan Sports (@ddsportschannel) July 8, 2026
एक शानदार करियर और क्रिकेट प्रशासन में दादा का योगदान
सौरव गांगुली का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने नवंबर 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने आखिरी टेस्ट मैच के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। अपने करियर में उन्होंने 311 वनडे मैचों में 11,363 रन बनाए, जिसमें 22 शानदार शतक शामिल थे। साथ ही, उन्होंने अपनी गेंदबाजी से 132 विकेट भी लिए। टेस्ट क्रिकेट की बात करें तो उन्होंने 113 मैचों में 7,212 रन बनाए। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वे खेल से दूर नहीं रहे। उन्होंने अक्टूबर 2019 से अक्टूबर 2022 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष के रूप में भारतीय क्रिकेट की बागडोर संभाली। वर्तमान में वे दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेट डायरेक्टर और SA20 में प्रिटोरिया कैपिटल्स के हेड कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कप्तानी और भारतीय क्रिकेट का कायाकल्प: गांगुली का सबसे बड़ा योगदान
सौरव गांगुली का सबसे यादगार दौर 2000 से 2005 के बीच उनकी कप्तानी का रहा। मैच फिक्सिंग के संकट से जूझ रही भारतीय टीम को फिर से खड़ा करने और उनमें आक्रामक जीत की भूख पैदा करने का श्रेय गांगुली को ही जाता है। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी जीती, 2002 चैंपियंस ट्रॉफी में संयुक्त विजेता बना, 2003 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल तक का सफर तय किया और 2004 में पाकिस्तान में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीतकर दुनिया को हैरान कर दिया। ईडन गार्डन्स में 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हासिल की गई उस अविश्वसनीय जीत को आज भी क्रिकेट फैंस याद करते हैं। सौरव गांगुली का यह सम्मान उनके न केवल खिलाड़ी बल्कि एक बेहतरीन नेतृत्वकर्ता के रूप में किए गए योगदान का प्रमाण है।
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