WB Rajya Sabha Bypoll : पश्चिम बंगाल में आगामी राज्यसभा उपचुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक चाल चल दी है। पार्टी ने सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों नेताओं ने आज ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन छोड़कर भाजपा का झंडा थाम लिया है। इन तीनों नेताओं ने पिछले महीने ही संसद के उच्च सदन से अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से ही बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में इनका औपचारिक स्वागत किया और उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।

सबके लिए नहीं खुले हैं दरवाजे
भाजपा में इन नेताओं के शामिल होने को लेकर प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि इन तीन नेताओं को पार्टी में शामिल करना एक ‘अपवाद’ माना जाना चाहिए। इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं लगाया जाना चाहिए कि भाजपा तृणमूल के हर असंतुष्ट सदस्य के लिए अपने दरवाजे खोल रही है। भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि इन नेताओं का राजनीतिक रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग रहा है और तृणमूल में रहते हुए भी इन पर भ्रष्टाचार का कोई भी गंभीर आरोप नहीं लगा है। उनकी स्वच्छ छवि को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है, जो उनके शामिल होने के तुरंत बाद ही स्पष्ट हो गया था।

ममता सरकार से मोहभंग की कहानी
इन तीनों नेताओं के इस्तीफे की पृष्ठभूमि में आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म-हत्याकांड के बाद उपजा असंतोष मुख्य रहा है। सुखेंदु शेखर रॉय ने 8 जून, सुष्मिता देव ने 10 जून और प्रकाश बराइक ने 11 जून को राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। ये नेता लंबे समय से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार की कार्यप्रणाली के आलोचक रहे थे। विशेष रूप से कोलकाता की हालिया त्रासद घटनाओं पर उन्होंने सरकार की निष्क्रियता की खुलकर आलोचना की थी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें दरकिनार कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने TMC से अपना नाता तोड़ लिया और अंततः भाजपा का रुख किया।
विधानसभा समीकरण
राज्यसभा उपचुनाव के लिए मौजूदा विधानसभा समीकरण भाजपा के पक्ष में पूरी तरह झुके हुए नजर आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के पास वर्तमान में 208 विधायकों का समर्थन है। उपचुनाव में जीत हासिल करने के लिए किसी भी विपक्षी उम्मीदवार को कम से कम 70 वोटों की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान स्थिति में असंभव सा लगता है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक कलह का लाभ भाजपा को मिलता दिख रहा है। आधिकारिक तौर पर TMC के पास 80 विधायक हैं, लेकिन उनमें से 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट का हिस्सा हैं, जो ममता और अभिषेक बनर्जी के विरोधी हैं। इस भारी बहुमत के साथ भाजपा की इन तीनों सीटों पर जीत की संभावना लगभग पक्की मानी जा रही है।
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