Bay of Bengal News : बंगाल की खाड़ी से एक बेहद चिंताजनक और हृदयविदारक खबर सामने आई है। समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकली ‘मां काली’ नामक एक ट्रॉलर गहरे जल क्षेत्र में लापता हो गई है। इस ट्रॉलर पर कुल 15 मछुआरे सवार थे, जिनका पिछले कई दिनों से कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, यह ट्रॉलर 2 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के शंकरपुर फिशिंग हार्बर से रवाना हुई थी। समुद्र में उठे खराब मौसम और भीषण लहरों के बीच इस ट्रॉलर का संपर्क अपने बेस से अचानक टूट गया। तब से ही मछुआरों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और हर कोई उनके सुरक्षित होने की प्रार्थना कर रहा है।

खराब मौसम और निम्न दबाव ने पैदा किया संकट
लापता हुए मछुआरों में ओडिशा के बालेश्वर जिले के भोगराई ब्लॉक स्थित उलुदा गांव के तीन निवासी शामिल हैं। इनकी पहचान रबिंद्र माझी, जगन्नाथ माझी और जयराम माझी के रूप में हुई है। वहीं, ट्रॉलर पर सवार अन्य 12 मछुआरे पश्चिम बंगाल के बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के कारण समुद्र की स्थिति अत्यंत प्रतिकूल हो गई थी। ऊंची लहरों और तूफानी हवाओं के सामने यह ट्रॉलर टिक नहीं सकी और संपर्क से बाहर हो गई। यह घटना एक बार फिर समुद्र में काम करने वाले मछुआरों की सुरक्षा और खराब मौसम के दौरान उनके द्वारा झेले जाने वाले जोखिमों को उजागर करती है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए प्रशासन से गुहार, नेवी की मदद की उम्मीद
घटना की सूचना मिलते ही दीघा फिशरमेन एंड फिश ट्रेडर्स एसोसिएशन ने सक्रियता दिखाई और दीघा व मंदारमणि मरीन पुलिस को सूचित किया। शंकरपुर फिशरमैन एंड फिश ट्रेलर्स एसोसिएशन के सचिव स्वदेश नायक ने इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सांसद सोमेंदो अधिकारी और विधायक चंद्रशेखर से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि मछुआरों को खोजने के लिए तुरंत भारतीय नौसेना (नेवी) और हेलीकॉप्टरों की तैनाती की जाए। परिवारों की व्यथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मछुआरों के परिजन पूरी तरह टूट चुके हैं और हर बीतते घंटे के साथ उनकी चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
प्रशासन की टीमें सक्रिय, हेलीकॉप्टर से की जा रही तलाश
लापता ट्रॉलर और उसमें सवार 15 मछुआरों की तलाश के लिए युद्ध स्तर पर सर्च ऑपरेशन जारी है। प्रशासन ने बचाव अभियान को तेज करते हुए समुद्र के व्यापक दायरे में खोजबीन शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन और तटीय पुलिस के साथ मिलकर अन्य बचाव एजेंसियां भी इस काम में जुटी हैं। अब तक किसी भी मछुआरे के सुरक्षित होने या ट्रॉलर के मलबे के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण बनी हुई है। बचाव दलों द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं, और परिजन प्रशासन से जल्द से जल्द सकारात्मक सूचना मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।












