Mahamaya Temple Prasad: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर के प्रसाद को लेकर एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। मंदिर के सामने स्थित दुकानों से बेचे जाने वाले मोतीचूर के लड्डूओं में भारी मिलावट की पुष्टि हुई है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की जब सरकारी लैब में जांच कराई गई, तो अधिकांश सैंपल मानकों पर पूरी तरह विफल पाए गए। इस खुलासे ने न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि दूर-दराज से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर जैसी पवित्र जगह पर मिलने वाले प्रसाद में इस तरह की मिलावट ने प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया है।

सेहत के लिए असुरक्षित: एस्पार्टेम और सिंथेटिक रंगों का घातक मिश्रण
भोपाल स्थित ‘सीईएस एनालिटिकल एंड रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ की आधिकारिक रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि मंदिर के सामने मिलने वाला यह प्रसाद मानवीय उपभोग के लिए असुरक्षित है। जांच में पाया गया कि लड्डूओं में मिठास पैदा करने के लिए प्राकृतिक शकर के स्थान पर ‘एस्पार्टेम’ (Aspartame) नामक कृत्रिम स्वीटनर का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एस्पार्टेम का अधिक सेवन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को आमंत्रण दे सकता है। इसके साथ ही, लड्डूओं को आकर्षक और चमकदार पीला-नारंगी रंग देने के लिए ‘सनसेट येलो’ (Sunset Yellow) नामक सिंथेटिक कलर का प्रयोग किया जा रहा है, जिसकी मात्रा भी निर्धारित सुरक्षित मानकों से कहीं अधिक पाई गई है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और दुकानों का निरीक्षण
रिपोर्ट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग हरकत में आया है। विभाग के जिला अधिकारी (DO) नितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मंदिर के सामने स्थित ‘आनंद पूजा भंडार’ से लिए गए बूंदी लड्डू के नमूनों की जांच में एस्पार्टेम और हानिकारक रंगों की पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर संबंधित दुकान के खिलाफ ‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम’ के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार, 9 जुलाई को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मंदिर परिसर के आसपास स्थित अन्य प्रसाद की दुकानों का भी औचक निरीक्षण किया और वहां से भी नए सिरे से सैंपलिंग की है।
श्रद्धालुओं की सेहत से खिलवाड़: प्रशासन की ओर से कड़े निर्देश
प्रसाद की शुद्धता और पवित्रता को लेकर उठे इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है। विभाग ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि मंदिर क्षेत्र में बिकने वाली सभी खाद्य वस्तुओं के मानक तय मापदंडों के अनुरूप हों। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इन रसायनों का दीर्घकालिक सेवन शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह अत्यंत घातक है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस प्रकार की मिलावट करने वाले दुकानदारों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जाए, बल्कि उनका लाइसेंस भी निरस्त किया जाना चाहिए।
भविष्य के लिए सबक: श्रद्धालुओं के प्रति जिम्मेदारी
अंबिकापुर की इस घटना ने देश भर के धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले प्रसाद की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान का प्रसाद शुद्ध और सात्विक होना चाहिए, न कि मुनाफे की खातिर रसायनों का एक मिश्रण। खाद्य सुरक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में मंदिर क्षेत्र की दुकानों की नियमित रूप से जांच की जाएगी ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस बीच, श्रद्धालुओं से भी आग्रह किया गया है कि वे प्रसाद खरीदते समय सतर्क रहें और किसी भी संदेह की स्थिति में तत्काल अधिकारियों को सूचित करें। प्रसाद की शुद्धता सुनिश्चित करना अब प्रशासन और दुकानदारों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है।
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