Mahadev App Case : छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महादेव सट्टा एप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए आर्थिक जगत में हलचल मचा दी है। ईडी ने इस मामले के प्रमुख आरोपी विकास गर्ग और उनके परिवार के स्वामित्व वाली संस्थाओं से जुड़ी चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब्त की गई इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 940.77 करोड़ रुपये आंका गया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के सख्त प्रावधानों के तहत रायपुर जोनल ऑफिस द्वारा निष्पादित की गई है।

जब्त की गई संपत्तियों का विवरण
ईडी द्वारा की गई इस व्यापक कार्रवाई में विकास गर्ग से जुड़ी अनेक संपत्तियां शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से आलीशान रिहायशी मकान, विशाल भूखंड, फॉर्म हाउस के साथ-साथ विभिन्न कंपनियों के इक्विटी शेयर और अन्य वित्तीय प्रतिभूतियां (Securities) शामिल हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि ये सभी संपत्तियां अवैध सट्टेबाजी के जरिए कमाए गए काले धन से अर्जित की गई थीं। इन संपत्तियों को कानूनी दायरे में लाकर ईडी ने सट्टेबाजी सिंडिकेट की कमर तोड़ने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

देशव्यापी जांच और आपराधिक साजिश का पर्दाफाश
इस मामले की जड़ें छत्तीसगढ़ के दुर्ग से लेकर आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक फैली हुई हैं। ईडी ने विभिन्न राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर अपनी जांच का दायरा विस्तृत किया था। इन एफआईआर में ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों और उनके सहयोगियों पर गंभीर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगे थे। ईडी की गहन जांच में यह सामने आया कि यह सिंडिकेट विदेश में बैठे प्रमोटरों के माध्यम से फ्रैंचाइजी-आधारित ‘पैनल’ नेटवर्क चला रहा था, जिससे अवैध सट्टेबाजी के माध्यम से प्रतिमाह 450 करोड़ रुपये से अधिक की काली कमाई हो रही थी।
मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल और शातिर नेटवर्क
जांच में पता चला कि ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ और ‘स्काईएक्सचेंज’ जैसे सट्टा प्लेटफॉर्म से होने वाली आय को वैध दिखाने के लिए एक बेहद जटिल जाल बुना गया था। सट्टे के पैसों को शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के माध्यम से ‘अकोमोडेशन एंट्रीज’ के कई स्तरों में घुमाया गया। विकास गर्ग की संस्थाओं को लगभग 940.77 करोड़ रुपये की यह अवैध राशि विभिन्न माध्यमों से हस्तांतरित की गई, जिसे बाद में शेयर बाजार और रियल एस्टेट में निवेश कर दिया गया। ईडी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का उद्देश्य अवैध पैसे को सफेद धन का चोला पहनाना था।
3,800 करोड़ रुपये तक पहुंची जब्ती की कुल राशि
महादेव सट्टा एप मामले में ईडी की यह आठवीं बड़ी कार्रवाई है। इससे पूर्व सात ‘प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर’ जारी किए जा चुके हैं और रायपुर स्थित विशेष PMLA अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। ताजा कार्रवाई से पहले तक इस मामले में करीब 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी थीं। अब इस नवीनतम 940 करोड़ की जब्ती के बाद, महादेव सट्टा मामले में ईडी द्वारा जब्त की गई कुल चल-अचल संपत्तियों का मूल्य लगभग 3,800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कार्रवाई अवैध सट्टेबाजी के खिलाफ भारत सरकार के सख्त रुख को प्रदर्शित करती है।











