Ambikapur News : अंबिकापुर की पंचम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश स्मिता रत्नावत की अदालत ने एक सनसनीखेज हत्याकांड में अपना महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने सविता सिंह नामक महिला की हत्या के दोषी कुंजलाल सारथी को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह मामला नवंबर 2022 का है, जब अंबिकापुर के मंडल कालोनी सुभाषनगर स्थित एक किराए के मकान में महिला का शव मिला था। अदालत ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों की सुनवाई के उपरांत कुंजलाल सारथी को भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या का दोषी करार दिया। सजा के आदेश के साथ ही न्यायालय ने यह भी निर्देशित किया कि दोषी यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

क्या था पूरा मामला और घटना का दिन?
मृतक सविता सिंह गांधीनगर बाजार में सब्जी बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी। घटना के दिन, 22 नवंबर 2022 को जब उसके बच्चे स्कूल से सीधे गांधीनगर बाजार पहुंचे, तो उन्होंने अपनी मां को वहां नहीं पाया। परिचितों से पता करने पर बच्चे घर पहुंचे, जहाँ उन्होंने कमरे के भीतर अपनी मां का शव देखा। सविता का गला चुन्नी से कसा हुआ था। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता से जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि महिला के साथ पिछले दो महीनों से बसंतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम ककनेसा निवासी 56 वर्षीय कुंजलाल सारथी पति-पत्नी के रूप में रह रहा था। घटना वाले दिन सुबह कुंजलाल घर पर ही था, लेकिन वारदात के बाद से वह फरार हो गया था।

संदेह के आधार पर पकड़े जाने पर खुला हत्या का राज
पुलिस ने संदेह के आधार पर कुंजलाल सारथी की तलाश शुरू की और उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी ने पुलिस को बताया कि सविता सिंह अक्सर अपने मोबाइल फोन पर किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत किया करती थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। घटना के दिन भी इसी चरित्र संदेह के कारण उनके बीच तीखी बहस हुई। विवाद इतना बढ़ गया कि कुंजलाल ने आपा खो दिया और चुन्नी से गला घोंटकर तथा सविता को जमीन पर पटककर उसकी निर्मम हत्या कर दी। इस स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
न्यायालय का आदेश और सजा का समायोजन
इस मामले में पुलिस ने गहन विवेचना के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। न्यायाधीश स्मिता रत्नावत की अदालत में चले इस लंबे मुकदमे के बाद साक्ष्यों के आधार पर यह निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि आरोपी कुंजलाल सारथी पिछले तीन वर्ष और सात माह से अधिक समय से जेल में निरुद्ध है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि आरोपी द्वारा जेल में काटी गई यह अवधि उसकी आजीवन कारावास की अधिरोपित सजा में समायोजित की जाएगी। यह फैसला समाज में बढ़ती घरेलू हिंसा और आपसी संदेह के कारण होने वाले अपराधों के प्रति एक कड़ा संदेश है।
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